गांधीनगर निकाय चुनाव: कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी पर पुलिस स्टेशन में हंगामे और तनाव भड़काने का केस दर्ज
गुजरात के गांधीनगर में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी समेत आठ लोगों के खिलाफ एक पुलिस स्टेशन में हंगामा करने, सरकारी काम में बाधा डालने और समुदायों के बीच तनाव भड़काने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई…
गुजरात के गांधीनगर में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी समेत आठ लोगों के खिलाफ एक पुलिस स्टेशन में हंगामा करने, सरकारी काम में बाधा डालने और समुदायों के बीच तनाव भड़काने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला 8 अक्टूबर की एक घटना से जुड़ा है, लेकिन इसकी एफआईआर रविवार रात को उस दिन दर्ज की गई जिस दिन गांधीनगर नगर निगम (GMC) के लिए मतदान हो रहा था।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने सोमवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी। पेथापुर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। एफआईआर पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. देसाई की शिकायत पर आधारित है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के मुताबिक, यह घटना 8 अक्टूबर को पेथापुर पुलिस स्टेशन में हुई थी। उस दिन, वार्ड 4 से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रचारक भावेश भावसार को धमकाया था। आरोप है कि परमार ने भावसार को इलाके में प्रचार न करने की चेतावनी दी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।
विधायक मेवाणी पर क्या हैं आरोप?
पुलिस इंस्पेक्टर देसाई का आरोप है कि जब वे यूनुस परमार से पूछताछ कर रहे थे, तभी विधायक जिग्नेश मेवाणी अपने समर्थकों के साथ गैर-कानूनी रूप से भीड़ बनाकर पूछताछ कक्ष में घुस आए। एफआईआर में कहा गया है कि उन्होंने इंस्पेक्टर को ड्यूटी करने से रोका, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और जबरन परमार का बयान दर्ज नहीं होने दिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इसके बाद मेवाणी और उनके समर्थक पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए और ठाकोर समुदाय का नाम लेकर नारे लगाए। पुलिस का आरोप है कि इन हरकतों का मकसद लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काना, शांति भंग करना और समुदायों के बीच तनाव पैदा करना था।
सोशल मीडिया और कानूनी धाराएं
एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने इस पूरी घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और फिर इसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। आरोप है कि इसका इरादा विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना था। पुलिस ने बताया कि इन लोगों की हरकतों ने गांधीनगर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा जारी अधिसूचना का भी उल्लंघन किया।
मेवाणी और सात अन्य पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने (धारा 189(2), 191(2)), आपराधिक धमकी (धारा 351(2)), और शांति भंग करने के इरादे से अपमान (धारा 352) शामिल हैं। इसके अलावा गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 भी लगाई गई है।
इनपुट: IANS



