गुजरात नकली प्लाज्मा कांड: जांच का दायरा 5 राज्यों तक फैला, महाराष्ट्र के दो ब्लड बैंक संचालकों समेत 3 और गिरफ्तार
गुजरात में सामने आए नकली प्लाज्मा रैकेट मामले की जांच का दायरा अब पांच अन्य राज्यों तक पहुंच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया
गुजरात में सामने आए नकली प्लाज्मा रैकेट मामले की जांच का दायरा अब पांच अन्य राज्यों तक पहुंच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात हो गई है। यह कार्रवाई तब हुई जब जांचकर्ताओं ने पाया कि मिलावटी प्लाज्मा की आपूर्ति एक अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए की जा रही थी।
गुरुवार को हुई ताजा गिरफ्तारियों में अहमदाबाद के बावला निवासी अजीत सोलंकी (33) के अलावा महाराष्ट्र के दो ब्लड बैंक संचालक प्रकाश सांगले और अशोक सांगले शामिल हैं। पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के मुताबिक, ये तीनों दवा कंपनियों के लिए भेजे जा रहे असली प्लाज्मा को मिलावटी प्लाज्मा से बदलने, उसके परिवहन और वितरण में कथित रूप से शामिल थे।
कैसे काम करता था यह रैकेट?
अधिकारियों का आरोप है कि इस रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता दिनेश चौधरी है, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। वह प्लाज्मा संग्रह और परिवहन प्रक्रिया की अपनी जानकारी का फायदा उठाकर असली प्लाज्मा को रास्ते में ही मिलावटी पदार्थ से बदल देता था। पुलिस ने बताया कि चौधरी अनुपयोगी प्लाज्मा मोहन गायकवाड़ से लेता था, जो इसे महाराष्ट्र के एक ब्लड बैंक से हासिल करता था। फिर असली प्लाज्मा को निकालकर उसमें मिलावट की जाती थी और उसे आगे भेज दिया जाता था।
जांच में पता चला है कि आरोपी अजीत सोलंकी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से प्लाज्मा की खेप लाता था और दवा कंपनी तक पहुंचाने से पहले असली प्लाज्मा दिनेश चौधरी को दे देता था। पुलिस ने लगभग 25 लाख रुपये कीमत का पिकअप वाहन भी जब्त किया है।
पांच राज्यों तक फैली जांच
इस रैकेट के तार अब महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से जुड़ गए हैं। पुलिस का आरोप है कि महाराष्ट्र के वाशिम जिले में ब्लड बैंक चलाने वाले प्रकाश और अशोक सांगले ने इस मिलावटी प्लाज्मा को बेंगलुरु की एक अन्य दवा कंपनी तक पहुंचाने में मदद की। इस मामले का खुलासा पिछले महीने चांगोदर की एक दवा कंपनी की शिकायत के बाद हुआ था, जिसने कहा था कि उसके प्लांट तक पहुंचने से पहले प्लाज्मा की खेप से छेड़छाड़ की गई है।
इनपुट: IANS



