गुजरात: बिरसा मुंडा आदिवासी विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह, 667 छात्रों को मिली डिग्री
गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित बिरसा मुंडा आदिवासी विश्वविद्यालय ने रविवार को अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें 667 छात्र-छात्राओं को उनकी मेहनत का फल डिग्री के रूप में मिला। समाचार…
गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित बिरसा मुंडा आदिवासी विश्वविद्यालय ने रविवार को अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें 667 छात्र-छात्राओं को उनकी मेहनत का फल डिग्री के रूप में मिला। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस ऐतिहासिक अवसर पर 47 मेधावी स्नातकों को स्वर्ण और रजत पदक से भी सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आचार्य देवव्रत ने की, जबकि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इस विश्वविद्यालय की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से की गई थी। पहले दीक्षांत समारोह में कला, वाणिज्य, विज्ञान, स्नातक, स्नातकोत्तर और एमएसडब्ल्यू जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल देवव्रत द्वारा की गई, जिसके बाद स्नातकों को दीक्षांत शपथ दिलाई गई।
"यह सिर्फ दीक्षांत समारोह नहीं, आदिवासी युवा बदलाव का जश्न है"
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस आयोजन को विश्वविद्यालय के लिए एक मील का पत्थर बताते हुए इसे आदिवासी युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के बढ़ते अवसरों से जोड़ा। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ पहला दीक्षांत समारोह नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित 'आदिवासी युवा बदलाव' का पहला जश्न भी है।"
मुख्यमंत्री ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि लगभग 25 साल पहले, इस पूरे क्षेत्र में स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कॉलेज था, जिस कारण छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सूरत और वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।
क्षेत्र में शिक्षा का विस्तार
पटेल ने बताया कि तब से अब तक आदिवासी इलाकों में उच्च शिक्षा के अवसरों में भारी वृद्धि हुई है। आज यहाँ पाँच इंजीनियरिंग कॉलेज, छह पॉलिटेक्निक और 11 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा आदिवासी विश्वविद्यालय और गोविंद गुरु विश्वविद्यालय ने आदिवासी समुदायों के लिए उच्च शिक्षा को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अपने संबोधन में उन्होंने स्नातक छात्रों से अपनी जड़ों, संस्कृति और ज़मीन से जुड़े रहने की अपील की। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सिर्फ सरकारी योजनाओं के लाभार्थी न बनें, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग स्थानीय विकास में करते हुए देश की प्रगति में भागीदार बनें और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ एक विकसित गुजरात के निर्माण में योगदान दें। इस अवसर पर जनजातीय विकास मंत्री नरेश पटेल ने भी वनबंधु कल्याण योजना और शाला प्रवेशोत्सव जैसी सरकारी पहलों पर प्रकाश डाला, जिन्होंने शिक्षा के विस्तार में मदद की है।
इनपुट: IANS



