व्हाट्सएप यूजरनेम विवाद: केंद्र सरकार सभी मैसेजिंग ऐप्स के लिए एक समान नियम लाने पर कर रही विचार
व्हाट्सएप द्वारा प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर उपजे विवाद के बाद केंद्र सरकार अब भारत में काम कर रहे सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नियम बनाने की संभावना तलाश रही है। समाचार एजेंसी IANS की
व्हाट्सएप द्वारा प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर उपजे विवाद के बाद केंद्र सरकार अब भारत में काम कर रहे सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नियम बनाने की संभावना तलाश रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) एक ऐसा साझा रेगुलेटरी ढांचा तैयार करने पर काम कर रहा है जो किसी एक ऐप पर नहीं, बल्कि सभी पर लागू होगा।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूरे मैसेजिंग सेक्टर में एकरूपता लाना और यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार की चिंता व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद यूजरनेम फीचर को लेकर है, जो यूजर्स को बिना अपना मोबाइल नंबर बताए बातचीत करने की सुविधा देता है।
सरकार को क्यों है यूजरनेम फीचर पर आपत्ति?
सरकार का मानना है कि मोबाइल नंबर की अनिवार्यता हटने से साइबर अपराधों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे धोखेबाजों को अपनी पहचान छिपाने में आसानी होगी, जिससे फिशिंग, प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे ऑनलाइन फ्रॉड के मामले बढ़ सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह सुविधा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी जांच को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देगी।
इन्हीं गंभीर चिंताओं के चलते सरकार ने पिछले हफ्ते व्हाट्सएप को एक नोटिस जारी किया था। इसमें कंपनी को निर्देश दिया गया था कि जब तक सरकार के साथ परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले सभी प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ विस्तार से चर्चा करेगी। इससे पहले, जुलाई में व्हाट्सएप और टेलीग्राम, दोनों ही कंपनियां अपने यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार के नोटिस का जवाब दे चुकी हैं। व्हाट्सएप का कहना है कि यह फीचर यूजर्स को अतिरिक्त गोपनीयता (प्राइवेसी) देता है, लेकिन सरकार इसके सुरक्षा पहलुओं का व्यापक मूल्यांकन करना चाहती है।
इनपुट: IANS



