किसानों को मिले करीब 26 करोड़ सॉइल हेल्थ कार्ड, देश में 8.80 लाख हेक्टेयर में हो रही है प्राकृतिक खेती
भारत में खेती-किसानी देश की 46% से ज़्यादा आबादी की आजीविका का आधार है। यही वजह है कि किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की स्थिरता सीधे तौर पर मिट्टी की सेहत से जुड़ी है। इसी को ध्यान में…
भारत में खेती-किसानी देश की 46% से ज़्यादा आबादी की आजीविका का आधार है। यही वजह है कि किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की स्थिरता सीधे तौर पर मिट्टी की सेहत से जुड़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने टिकाऊ खेती और मिट्टी के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कई राष्ट्रीय प्रयास किए हैं, जिनके ताज़ा आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉइल हेल्थ कार्ड योजना के तहत अब तक 25.89 करोड़ कार्ड किसानों को दिए जा चुके हैं।
यह कार्ड मिट्टी की जांच के आधार पर किसानों को यह सलाह देता है कि उन्हें अपनी फसल के लिए कौन से पोषक तत्वों और उर्वरकों का कितनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए। सरकार का मानना है कि इससे संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
प्राकृतिक खेती और जागरूकता अभियान
सरकार प्राकृतिक खेती पर भी विशेष जोर दे रही है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) का दायरा अब 18,786 क्लस्टर तक फैल गया है, जिसके तहत कुल 8.80 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर प्राकृतिक खेती हो रही है। इसके साथ ही, किसानों को जागरूक करने के लिए एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसियों (एटीएमए) और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के सहयोग से करीब 7.17 लाख प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। सरकार 'खेत बचाओ अभियान' जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए भी किसानों को टिकाऊ खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
तकनीक का इस्तेमाल और ज़मीनी स्तर पर मदद
आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, जियोस्पेशियल मैपिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल मिट्टी के मूल्यांकन और किसानों को सलाह देने की प्रक्रिया को और प्रभावी बना रहा है। ज़मीनी स्तर पर किसानों की मदद के लिए 70,002 कृषि सखियों को प्रशिक्षित किया गया है, जो गांव-गांव जाकर मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी और सलाह देती हैं। यही नहीं, स्कूली बच्चों को इस मुहिम से जोड़ने के लिए 'स्कूल सॉइल हेल्थ प्रोग्राम' भी चलाया जा रहा है, जिसमें वर्ष 2025-26 के लिए 4,430 स्कूलों और 1,29,167 विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ है।
जलवायु परिवर्तन और कार्बन सिंक का लक्ष्य
सरकार के अनुसार, नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (NMSA) और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग जैसी योजनाएं जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रही हैं। वहीं, ग्रीन इंडिया मिशन और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम जैसी पहलें मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने में मदद कर रही हैं। भारत ने 2030 तक 2.5 से 3.0 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य रखा है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार, 2005 से 2021 के बीच देश में 2.29 अरब टन का अतिरिक्त कार्बन सिंक पहले ही तैयार किया जा चुका है।
इनपुट: IANS



