सरकारी खजाने में विनिवेश से बहार, चालू वित्त वर्ष में अब तक ₹26,639 करोड़ से ज्यादा जुटाए गए
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी संपत्तियों से कमाई का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 22 जुलाई तक सरकार ने विनिवेश और एसेट…
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी संपत्तियों से कमाई का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 22 जुलाई तक सरकार ने विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन (परिसंपत्ति मुद्रीकरण) के जरिए 26,639.33 करोड़ रुपए की बड़ी राशि जुटाई है। यह आंकड़ा पिछले चार सालों में इसी अवधि के दौरान हुई कमाई में सबसे ज़्यादा है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जुटाई गई कुल राशि में से 20,272.40 करोड़ रुपए सरकारी कंपनियों (CPSEs) में हिस्सेदारी बेचकर हासिल हुए हैं, जबकि 6,366.93 करोड़ रुपए परिसंपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से आए हैं।
हिस्सेदारी बिक्री और कमाई का ब्योरा
इस वित्त वर्ष में सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए सात बड़ी सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की है। इन कंपनियों से हुई कमाई इस प्रकार है:
- कोल इंडिया: ₹5,500 करोड़ से अधिक
- एनएचपीसी: ₹4,300 करोड़ से अधिक
- जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC): ₹3,000 करोड़ से अधिक
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: ₹2,200 करोड़ से अधिक
- इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC): ₹2,000 करोड़ से अधिक
- कोचीन शिपयार्ड: ₹1,700 करोड़ से अधिक
- एनएलसी इंडिया: ₹1,200 करोड़ से अधिक
OFS एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी सूचीबद्ध कंपनी के प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी स्टॉक एक्सचेंज के जरिए सीधे निवेशकों को बेच सकते हैं। यह तरीका IPO या FPO के मुकाबले कम औपचारिकताओं वाला और तेज़ होता है।
विनिवेश की प्रक्रिया और लक्ष्य
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने वित्त वर्ष 2023-24 से विनिवेश के लिए कोई अलग से लक्ष्य निर्धारित करना बंद कर दिया है। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 'विविध पूंजीगत प्राप्तियों' (Miscellaneous Capital Receipts) के तहत 80,000 करोड़ रुपए का अनुमान रखा गया है। इसमें सरकारी हिस्सेदारी बेचने और सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन से होने वाली आय शामिल है।
सरकार के मुताबिक, विनिवेश एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और इसकी कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की जा सकती। किसी भी सौदे को पूरा होने में बाजार के हालात, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, निवेशकों की रुचि और भू-राजनीतिक घटनाओं जैसे कई कारक अहम भूमिका निभाते हैं।
सरकार की मौजूदा संपत्ति
वर्तमान में, शेयर बाजार में 68 केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (CPSEs) सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी का कुल मूल्य 22.80 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है। इसके अलावा, 16 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और बीमा कंपनियां भी सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकारी हिस्सेदारी का मूल्य करीब 19 लाख करोड़ रुपए है।
इनपुट: IANS



