कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, OPEC+ देशों के उत्पादन बढ़ाने के फैसले से बाज़ार को मिली राहत
सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे तेल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे बाज़ार को कुछ राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस
सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे तेल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे बाज़ार को कुछ राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस (OPEC+) का उत्पादन बढ़ाने का फैसला और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की सप्लाई का सामान्य होना है।
सोमवार के कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.76% (55 सेंट) गिरकर 71.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1% (68 सेंट) की गिरावट के साथ 69 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था।
उत्पादन बढ़ाने पर क्यों बनी सहमति?
तेल की कीमतों में यह नरमी ओपेक प्लस देशों के उस फैसले के बाद आई है जिसमें उन्होंने अगस्त महीने के लिए अपना प्रोडक्शन टारगेट बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस कदम से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति में कमी आने की चिंताएं कम हो गई हैं।
प्रस्तावित योजना के तहत, सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सात प्रमुख उत्पादक देश अपना कुल उत्पादन लक्ष्य 1,88,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाएंगे। दरअसल, ओपेक प्लस समूह 2023 में कीमतों को स्थिर रखने के लिए लागू की गई स्वैच्छिक उत्पादन कटौती को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है।
बाज़ार में कितनी बढ़ेगी तेल की आपूर्ति?
अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो हालिया बढ़ोतरी को मिलाकर कुल उत्पादन कोटा में लगभग 9,40,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि हो जाएगी। यह मात्रा वैश्विक तेल मांग का करीब 1 प्रतिशत है। उत्पादन में इस ताज़ा बढ़ोतरी को 2023 में घोषित कटौती को वापस लेने की प्रक्रिया का सेकंड-लास्ट चरण माना जा रहा है। उम्मीद है कि सितंबर में एक और बढ़ोतरी के साथ उत्पादन पर लगी सभी पाबंदियां पूरी तरह हटा ली जाएंगी।
तनाव घटने और सप्लाई सुधरने का असर
कीमतों में गिरावट की एक और बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल निर्यात का सामान्य होना है। अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ है, जिससे प्रमुख खाड़ी देशों के लिए उत्पादन और निर्यात फिर से शुरू करना आसान हो गया है।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अपना तेल निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के करीब पहुंचा दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ी है। इस अतिरिक्त आपूर्ति से प्रमुख एशियाई बाजारों में भी अधिशेष की स्थिति बनी है, जिसने तेल की कीमतों पर लगाम लगाई है।
इनपुट: IANS



