तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, पर क्या ख़तरा टल गया है?
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों पर विराम लगने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को बड़ी राहत दी है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे तेल के दोनों प्रमुख…
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों पर विराम लगने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को बड़ी राहत दी है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे तेल के दोनों प्रमुख बेंचमार्क लगभग 5 प्रतिशत तक लुढ़क गए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट ईरान के उस संकेत के बाद आई है, जिसमें उसने कहा है कि अगर अमेरिका अपने सैन्य अभियान रोकता है तो वह भी आगे कोई हमला नहीं करेगा। इस बयान ने तनाव के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
सोमवार सुबह 10:20 बजे तक, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.8% से ज़्यादा यानी 4.64 डॉलर की गिरावट के साथ लगभग 87.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 5.09% यानी 4.56 डॉलर गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
भू-राजनीतिक जोखिम अब भी बरकरार
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में इस तेज गिरावट के बावजूद जोखिम पूरी तरह से टला नहीं है। ईरान समर्थित हूती बलों ने सऊदी अरब के लाल सागर स्थित सऊदी अरामको के जिजान और यानबू बंदरगाहों पर हमले का दावा किया है, जो इस बात का संकेत है कि भू-राजनीतिक तनाव अब भी ऊँचे स्तर पर बना हुआ है। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े खतरे अभी समाप्त नहीं हुए हैं, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही अभी तक सामान्य नहीं हुई है।
यह हालिया नरमी पिछले तीन हफ्तों में आई जबरदस्त तेजी के बाद आई है, जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया था। उस वक्त बाजार को डर था कि पश्चिम एशिया का संघर्ष होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति को बाधित कर सकता है। ये दोनों मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग रूट माने जाते हैं। सोमवार की गिरावट के बावजूद, इस महीने कच्चे तेल की कीमतें अब भी लगभग 40% ऊपर हैं, क्योंकि आपूर्ति की बाधाएं होर्मुज स्ट्रेट से आगे बढ़कर लाल सागर तक फैल गई हैं, जो सऊदी अरब के तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण रास्ता है।
भारतीय रुपये पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे की मजबूती के साथ 96.15 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.56 पर बंद हुआ था।
इनपुट: IANS



