सोमवार, 24 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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अमरावती अस्पताल अग्निकांड: 3 नवजातों की मौत पर विपक्ष का सरकार पर हमला, व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

महाराष्ट्र के अमरावती जिला महिला अस्पताल में तीन नवजात शिशुओं की आग में जलकर मौत हो जाने की घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया है। विपक्ष ने इसे महज एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही…

अमरावती अस्पताल अग्निकांड: 3 नवजातों की मौत पर विपक्ष का सरकार पर हमला, व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र के अमरावती जिला महिला अस्पताल में तीन नवजात शिशुओं की आग में जलकर मौत हो जाने की घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया है। विपक्ष ने इसे महज एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का नतीजा बताते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस घटना को दिल दहला देने वाला बताया है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "अमरावती जिला महिला अस्पताल में एनआईसीयू विभाग में वेंटिलेटर में विस्फोट के कारण लगी आग में 3 नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य गंभीर हैं।" उन्होंने इस घटना को व्यवस्था में लापरवाही का नमूना बताते हुए गहन जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। सुले ने आगे कहा कि राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों का फायर ऑडिट और चिकित्सा उपकरणों का सेफ्टी ऑडिट कराया जाना बेहद जरूरी है।

विपक्ष के गंभीर आरोप

एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं में हमेशा गरीब लोग ही अपनी जान गंवाते हैं। उन्होंने IANS से कहा, "हमें लगता है कि यह सरकार गरीबों की जान की कोई परवाह नहीं करती।" पवार ने 2021 की एक ähnliche घटना का जिक्र करते हुए कहा कि तब एक समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि सरकार उस रिपोर्ट के आधार पर छह महीने का एक्शन प्लान तैयार करे।

वहीं, अस्पताल का दौरा करने के बाद पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता यशोमती चंद्रकांत ठाकुर ने सुविधाओं की कमी को उजागर किया। उन्होंने कहा, "यहां पर फायर ब्रिगेड नहीं थी। यह सत्तापक्ष की जिम्मेदारी बनती है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में अक्सर डॉक्टर नहीं मिलते और कुछ दिन पहले एक महिला को समय पर इलाज न मिलने से उसके बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई थी।

'सरकार को गरीबों की परवाह नहीं'

रोहित पवार ने सरकार पर अमीरों और बड़ी कंपनियों को तरजीह देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "वर्तमान सरकार में अमीरों की कीमत है... लेकिन गरीबों की कीमत इस सरकार में नहीं है।" उन्होंने पिछले तीन वर्षों के आंकड़े देते हुए दावा किया कि आदिवासी बच्चों के स्कूलों और हॉस्टलों में कुपोषण, बीमारियों और दुर्घटनाओं जैसी वजहों से करीब 44,000 बच्चों की मौत हुई है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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