भारत में ऑफिस स्पेस की मांग में ग्लोबल कंपनियों का दबदबा, दो साल में आधी हिस्सेदारी होगी
भारत के ऑफिस स्पेस बाजार में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो वर्षों में देश के कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की मांग में इन सेंटर्स की हिस्सेदारी…
भारत के ऑफिस स्पेस बाजार में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो वर्षों में देश के कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की मांग में इन सेंटर्स की हिस्सेदारी करीब 50% तक पहुंच सकती है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी कोलियर्स की रिपोर्ट बताती है कि यह रुझान भारत को एक वैश्विक इनोवेशन हब के रूप में और मजबूती देगा।
अनुमान है कि 2026 और 2027 में GCC सालाना 3.5 से 4 करोड़ वर्ग फुट तक ऑफिस स्पेस लीज पर लेंगे, जो कुल मांग का 45-50% हिस्सा होगा। यह दर्शाता है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को सिर्फ बैक-ऑफिस संचालन के लिए नहीं, बल्कि रणनीतिक कार्यों के लिए भी चुन रही हैं।
सिर्फ बैक-ऑफिस नहीं, इनोवेशन के केंद्र
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्थापित ये ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अब केवल पारंपरिक कामों तक सीमित नहीं हैं। ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रणनीतिक केंद्र बन चुके हैं। कोलियर्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (ऑफिस सर्विसेज) अर्पित मेहरोत्रा ने कहा, "भारत ने प्रतिभा, लागत दक्षता, तकनीकी क्षमता, नीतिगत समर्थन और अनुकूल कारोबारी माहौल के दम पर जीसीसी आधारित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को मजबूती से स्थापित किया है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले समय में AI आधारित इनोवेशन ऑफिस स्पेस की मांग का एक प्रमुख चालक बना रहेगा।
आंकड़ों में GCC का बढ़ता प्रभाव
आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। 2021 से अब तक, देश के सात प्रमुख शहरों में GCC ने करीब 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस किराए पर लिया है, जो इस अवधि की कुल ऑफिस मांग का 37% है। अकेले 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में ही GCC की लीजिंग 1.66 करोड़ वर्ग फुट रही, जो उस दौरान लीज पर लिए गए कुल ऑफिस स्पेस का 46 प्रतिशत था।
किन शहरों और सेक्टरों में है सबसे ज्यादा मांग?
शहरों के मामले में बेंगलुरु और हैदराबाद GCC बाजार में सबसे आगे हैं, जहाँ 2021 से अब तक हुई कुल लीजिंग में इन दोनों की मिलाकर 60% से अधिक हिस्सेदारी है। हालांकि, अब चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे अन्य शहर भी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। सेक्टरों की बात करें तो 2021 से टेक्नोलॉजी सेक्टर 39% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा है। वहीं, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) सेक्टर की हिस्सेदारी 22% और इंजीनियरिंग व मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 16% रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2021 से 2025 के बीच BFSI सेक्टर की लीजिंग में लगभग तीन गुना और इंजीनियरिंग व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 2.5 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।
इनपुट: IANS



