सोमवार, 6 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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मानसून की भारी कमी के बावजूद खाद्य महंगाई काबू में, लेकिन आने वाले हफ्तों में बढ़ सकता है दबाव

भारत में मानसून की कमजोर शुरुआत और जलाशयों में घटते जल स्तर के बावजूद, फिलहाल खाद्य उत्पादों की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS को मिली एक रिपोर्ट के अनुसार, खाने-पीने की चीजों

मानसून की भारी कमी के बावजूद खाद्य महंगाई काबू में, लेकिन आने वाले हफ्तों में बढ़ सकता है दबाव
(फोटो: IANS)

भारत में मानसून की कमजोर शुरुआत और जलाशयों में घटते जल स्तर के बावजूद, फिलहाल खाद्य उत्पादों की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS को मिली एक रिपोर्ट के अनुसार, खाने-पीने की चीजों की महंगाई अभी नियंत्रण में है, हालांकि भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बारिश की यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले हफ्तों में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

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साप्ताहिक और सालाना कीमतों का हाल

रिपोर्ट के साप्ताहिक खुदरा आंकड़ों पर नजर डालें तो सब्जियों के दाम में 1.5% और अंडों में 1% की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, अनाज 0.5% और तेल व फैट 0.2% महंगे हुए। अगर सालाना आधार पर तुलना करें तो तेल और फैट की कीमतों में सबसे ज्यादा 11% की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, अंडे 6%, सब्जियां, दूध और मसाले 3-3%, अनाज 2% और दालें 1% महंगी हुई हैं।

मानसून की चिंताजनक तस्वीर

चिंता का मुख्य कारण मानसून का रुख है। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जुलाई तक देश में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत से 31% कम रही है। अकेले जून के महीने में यह कमी 40% थी, जो इसे पिछले एक दशक का सबसे सूखा जून का महीना बनाती है। बारिश की इस कमी का सीधा असर महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख खाद्य-उत्पादक राज्यों पर पड़ रहा है, जिससे खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर खतरा मंडरा रहा है।

जलाशयों में पानी का स्तर और बुवाई पर असर

कमजोर मानसून के कारण बुवाई का काम भी धीमा पड़ गया है। देश भर के जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का केवल 26% रह गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 39% कम है। मध्य भारत के जलाशयों में सबसे ज्यादा 32% पानी है, जबकि दक्षिण भारत (20%) और पूर्वी भारत (19%) में स्थिति सबसे गंभीर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि जुलाई 2024 में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है, जिससे खरीफ की बुवाई और मानसून को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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