सलेम की पनामरथुपट्टी झील: दो दशकों से सूखे जलाशय को बचाने के लिए किसानों ने उठाई आवाज़
तमिलनाडु के सलेम जिले में कभी पीने के पानी का मुख्य स्रोत रही विशाल पनामरथुपट्टी झील आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों से पानी की भारी…
तमिलनाडु के सलेम जिले में कभी पीने के पानी का मुख्य स्रोत रही विशाल पनामरथुपट्टी झील आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों से पानी की भारी कमी झेल रहे इस जलाशय के पुनरुद्धार के लिए स्थानीय किसानों और जल संरक्षण कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि इस झील को बचाने से न केवल भूजल स्तर सुधरेगा, बल्कि आसपास के दस गाँवों की खेती को भी नया जीवन मिलेगा।
लगभग 2,140 एकड़ में फैली और तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरी यह झील कभी सलेम शहर और रासीपुरम की प्यास बुझाती थी। आज स्थिति यह है कि इसमें पानी की कमी से आसपास के इलाकों में खेती और भूजल की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ा है। किसानों के मुताबिक, यह जलाशय पर्यावरण और जल-विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र की कई छोटी झीलों और जल-धाराओं से जुड़ा हुआ है।
क्या है किसानों का सुझाव?
किसानों ने अधिकारियों से मेट्टूर जल प्रणाली से कावेरी नदी के अतिरिक्त पानी को पनामरथुपट्टी झील की ओर मोड़ने की संभावना तलाशने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि पूलमपट्टी क्षेत्र से अतिरिक्त पानी पंप करने की एक परियोजना पहले से मौजूद है। इसी परियोजना के नेटवर्क का अध्ययन करके यह पता लगाया जा सकता है कि क्या कुछ पानी इस झील तक पहुँचाया जा सकता है।
इसके अलावा, किसानों ने पुनरुद्धार की दिशा में पहले कदम के तौर पर झील के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुके आक्रामक 'सीमाई करुवेलम' पेड़ों को हटाने और पानी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा बन रहे अतिक्रमणों को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने झील की तलहटी का आकलन कर उसकी जल भंडारण क्षमता को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया है।
क्यों रुका हुआ है सफाई का काम?
जल संरक्षण कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस साल की शुरुआत में झील के कुछ हिस्सों में सफाई का काम शुरू हुआ था, लेकिन ठेकेदार की निविदा अवधि समाप्त होने के बाद यह रुक गया। सलेम सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि फरवरी में टेंडर के जरिए काम शुरू हुआ था, लेकिन अनुबंध खत्म होने पर ठेकेदार ने काम छोड़ दिया।
कॉरपोरेशन के अधिकारियों के अनुसार, अब एक नया टेंडर जारी करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि 'सीमा करुवेलम' को हटाना तत्काल प्राथमिकता होगी और जीर्णोद्धार का काम आगे बढ़ने पर मेट्टूर से अतिरिक्त पानी लाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा।
इनपुट: IANS



