महाराष्ट्र: किसानों के संघर्ष की जीत, सरकार ने कर्जमाफी योजना की विवादित शर्तें वापस लीं
महाराष्ट्र सरकार ने ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर कर्जमाफी योजना’ से जुड़ी उन प्रतिबंधात्मक शर्तों को हटाने का फैसला किया है, जिनके कारण लाखों किसानों के लाभ से वंचित होने का खतरा था। राष्ट्रवादी कां
महाराष्ट्र सरकार ने ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर कर्जमाफी योजना’ से जुड़ी उन प्रतिबंधात्मक शर्तों को हटाने का फैसला किया है, जिनके कारण लाखों किसानों के लाभ से वंचित होने का खतरा था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (एनसीपी-एसपी) के विधायक रोहित पवार ने इस फैसले को राज्य के किसानों, संगठनों और राजनीतिक दलों के सामूहिक संघर्ष की एक बड़ी जीत बताया है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, विधायक रोहित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार ने 2 जून को लगभग 56 लाख किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपए की भारी-भरकम कर्जमाफी की घोषणा तो की थी, लेकिन इसे बेहद जटिल और अनुचित शर्तों के साथ लागू किया गया था। इन शर्तों के कारण करीब 35 लाख से ज़्यादा किसान इस योजना के दायरे से बाहर हो सकते थे।
किन शर्तों पर था सबसे ज़्यादा ऐतराज़?
रोहित पवार ने दो प्रमुख शर्तों पर प्रकाश डाला, जिनका सबसे ज़्यादा विरोध हो रहा था। पहली शर्त के मुताबिक, जिन किसानों ने 2019 में कर्जमाफी का लाभ लिया था, उन्हें इस बार अधिकतम 50,000 रुपए की ही राहत दी जा रही थी। पवार ने इसे घोर अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि 2019 के बाद से किसान उर्वरक, बीज, मज़दूरी और परिवहन की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों का भी सामना कर रहे हैं।
दूसरी शर्त प्रोत्साहन सब्सिडी से जुड़ी थी। इसके लिए किसानों को पहले 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में से किन्हीं दो साल का फसल ऋण समय पर चुकाना था। लेकिन सरकार ने इसमें एक और शर्त जोड़ दी कि उन्हें 2025-26 और 2026-27 का कर्ज भी चुकाना होगा। इसका मतलब था कि प्रोत्साहन राशि पाने के लिए किसानों को कुल चार साल का ऋण चुकाना पड़ता।
विरोध प्रदर्शनों के बाद झुकी सरकार
इन शर्तों के खिलाफ राज्य में लगातार आंदोलन हुए। विधायक पवार ने बताया कि 12 से 14 जून तक पंढरपुर में किसानों और कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल की। यह हड़ताल मंत्री गिरीश महाजन के समीक्षा बैठक के आश्वासन के बाद खत्म हुई, लेकिन वह बैठक कभी हुई ही नहीं। इसके बाद, सरकार की चुप्पी के जवाब में 29 जून को छत्रपति संभाजीनगर में हजारों किसानों ने एक विशाल ‘एल्गार मोर्चा’ निकाला, जिसके बाद सरकार को झुकना पड़ा।
इनपुट: IANS



