पंजाब: नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या पर सरकार को घेरा, अस्पताल पहुंचे रवनीत बिट्टू हिरासत में
पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा के सिविल अस्पताल पहुंचे भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को मंगलवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। समाचार…
पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा के सिविल अस्पताल पहुंचे भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को मंगलवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बिट्टू वहां हत्याकांड में घायल हुए लोगों से मिलने गए थे। इस मौके पर उन्होंने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला।
बिट्टू ने परविंदर झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि सरकार आम लोगों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद नशे के बढ़ते खतरे पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सरकार और प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
रवनीत बिट्टू ने इस बात पर हैरानी जताई कि कथित तौर पर तीन जिलों के लिए सिर्फ एक ड्रग इंस्पेक्टर तैनात है। उन्होंने सवाल किया, "जब पर्याप्त प्रवर्तन कर्मचारी ही नहीं हैं तो सरकार नशे की समस्या से प्रभावी तरीके से कैसे निपटेगी?" उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री की जवाबदेही भी तय करने की मांग की।
बिट्टू ने कहा, "सरकार को बताना चाहिए कि नशा तस्करी के खिलाफ बोलने वालों को पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी गई। जब लोग इस समस्या की ओर खुलकर ध्यान दिला रहे थे, तब प्रशासनिक तंत्र कहां था?" उन्होंने यह भी बताया कि परविंदर झोटा लगातार ड्रग तस्करी के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे और उन्हें धमकियां भी मिल रही थीं।
पुलिस की जांच पर भी सवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पुलिस के शुरुआती बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिसमें इस घटना को कथित तौर पर आपसी रंजिश का नतीजा बताया गया था। उन्होंने कहा, "निष्पक्ष और व्यापक जांच पूरी होने से पहले पुलिस किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के निष्कर्ष पर कैसे पहुंच सकती है?" बिट्टू ने मांग की कि मामले के हर पहलू की जांच होनी चाहिए, जिसमें नशे के कारोबार से इसके संबंध का एंगल भी शामिल हो। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष, सबूतों पर आधारित और किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होनी चाहिए।
इनपुट: IANS



