मध्य-पूर्व में तनाव कम करने की कोशिशें तेज़, मिस्र और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच अहम बातचीत
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और कूटनीतिक रास्ते खोलने के लिए राजनयिक स्तर पर कोशिशें तेज़ हो गई हैं। इसी कड़ी में मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास…
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और कूटनीतिक रास्ते खोलने के लिए राजनयिक स्तर पर कोशिशें तेज़ हो गई हैं। इसी कड़ी में मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच फोन पर एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों शीर्ष राजनयिकों ने क्षेत्र के मौजूदा हालात और तनाव घटाने के लिए चल रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। मिस्र के विदेश मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में बताया गया कि अब्देलत्ती और अराघची ने एक ऐसा माहौल बनाने पर ज़ोर दिया जिससे कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू हो सके।
शांति और सुरक्षा पर ज़ोर
बातचीत के दौरान, मिस्र के विदेश मंत्री अब्देलत्ती ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "मौजूदा तनाव को कम करने और शांतिपूर्ण समझौतों तक पहुंचने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों को और तेज किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी। अब्देलत्ती ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों की सुरक्षा का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि सभी के हितों की रक्षा हो सके।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने अपने समकक्ष को हालिया घटनाओं, जारी वार्ताओं और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर ईरान का पक्ष समझाया।
क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका की भूमिका
यह कूटनीतिक पहल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव की पृष्ठभूमि में हो रही है। दोनों देशों को एमओयू के तहत 60 दिनों में एक अंतिम समझौते पर पहुँचना था, लेकिन यह अवधि सोमवार को समाप्त हो गई और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़े तनाव ने वार्ता के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ही ईरान के खिलाफ 'अब तक का सबसे कड़ा आर्थिक अभियान' शुरू करने की घोषणा की थी।
वहीं, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि ईरान को पड़ोसी देशों से क्षेत्र में 'नई सुरक्षा व्यवस्था और आर्थिक सहयोग' को लेकर कई संदेश मिले हैं। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने "इजरायल के हितों के लिए दबाव की राजनीति और सहयोगियों के हितों की अनदेखी करके अपने हर सहयोगी की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।" कालीबाफ ने कहा कि केवल एक स्वतंत्र क्षेत्रीय व्यवस्था ही सच्ची शांति सुनिश्चित कर सकती है।
इनपुट: IANS



