असम-अरुणाचल शराब तस्करी: ED ने 19 के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया, ₹1000 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच चल रहे एक बड़े शराब तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में 19 आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच चल रहे एक बड़े शराब तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में 19 आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत मुकदमा चलाने की शिकायत दर्ज की गई है। इन आरोपियों में पांच मुख्य व्यक्ति और 14 बॉन्डेड वेयरहाउस कंपनियां शामिल हैं।
यह मामला अरुणाचल प्रदेश में बनी शराब को अवैध तरीकों से असम में लाकर बेचने और इससे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी करने से जुड़ा है। ईडी ने असम पुलिस द्वारा दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित जिलों में दर्ज की गई 173 FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?
जांच के अनुसार, आरोपियों ने एक सुनियोजित सिंडिकेट बना रखा था। शराब का उत्पादन अरुणाचल प्रदेश में होता था, जिस पर 'केवल अरुणाचल प्रदेश में बिक्री के लिए' लिखा होता था। इसके बाद, बिना किसी वैध ट्रांजिट परमिट या एक्साइज वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट (EVC) के इसे असम में तस्करी कर लाया जाता था। ऐसा असम में लगने वाले भारी उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) से बचने के लिए किया जाता था।
ईडी के मुताबिक, मुख्य आरोपियों के तौर पर संजय दीवान, नीरज शर्मा, राजन लोहिया, शंकर देब और समीर मेहता का नाम शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि दीवान, शर्मा और लोहिया ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से लेकर रिटेल आउटलेट्स तक के एक बड़े नेटवर्क के जरिए अरुणाचल के शराब कारोबार पर लगभग पूरा नियंत्रण कर लिया था।
अपराध से कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग
ईडी की बैंकिंग जांच में पाया गया कि नौ थोक कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग 1,047.93 करोड़ रुपये नकद जमा के रूप में मिले। एजेंसी ने इसे अपराध से हुई कमाई माना है। इस पैसे को बाद में RTGS और NEFT के जरिए 14 बॉन्डेड वेयरहाउस कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और फिर इसे वैध कारोबारी मुनाफे के तौर पर दिखाया गया। लॉन्ड्रिंग से मिली इस रकम को निजी और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के खातों में डालकर चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।
बड़े पैमाने पर हुई टैक्स चोरी
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि शराब बनाने वाली यूनिट्स ने बिना जरूरी उत्पाद शुल्क चुकाए अपनी उत्पादन क्षमता बहुत बढ़ा ली थी, जिससे बड़ी मात्रा में बेहिसाब शराब का उत्पादन हुआ। इसी शराब को बाद में असम में तस्करी के जरिए खपाया गया। असम के आबकारी अधिकारियों ने जनवरी 2023 से अप्रैल 2026 के बीच ऐसे ही 739 मामलों में 2.63 लाख बल्क लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की थी, जिसकी कीमत करीब 52.77 करोड़ रुपये थी। ईडी का कहना है कि यह जब्ती तस्करी की गई कुल शराब का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है।
इनपुट: IANS



