शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

पोंजी स्कीम: 2110 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में शिवम एसोसिएट्स का प्रमुख ED की हिरासत में

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई राज्यों में फैली एक कथित पोंजी स्कीम के सिलसिले में शिवम एसोसिएट्स के प्रमुख शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस…

पोंजी स्कीम: 2110 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में शिवम एसोसिएट्स का प्रमुख ED की हिरासत में
(फोटो: IANS)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई राज्यों में फैली एक कथित पोंजी स्कीम के सिलसिले में शिवम एसोसिएट्स के प्रमुख शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्कीम के ज़रिए निवेशकों से लगभग 2110 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है। आरोपी को 24 अगस्त तक ED की हिरासत में भेज दिया गया है।

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ED ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की है। नीलन्नावर को 13 अगस्त को गिरफ्तार करने के बाद मंगलुरु की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे 12 दिनों की हिरासत मिली। एजेंसी के मुताबिक, शिवानंद फर्म में पैसों के लेन-देन का मुख्य प्रबंधन देखता था और सबसे बड़ा हिस्सेदार होने के कारण उसका कंपनी पर पूरा नियंत्रण था।

कैसे काम करती थी यह स्कीम?

जांच के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स ने निवेशकों को हर महीने 3% के निश्चित और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर पैसे जमा कराए। यह नेटवर्क कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में फैला हुआ था। कंपनी नए निवेशकों को जोड़ने के लिए एक डिजिटल नेटवर्क और रेफरल सिस्टम का इस्तेमाल करती थी, जिसमें नए सदस्य लाने वाले सलाहकारों को 0.5% कमीशन दिया जाता था।

नुकसान छिपाने के लिए नए निवेशकों का पैसा

ED की जांच में यह बात सामने आई कि कंपनी 2019 से ही शेयर बाजार में लगातार भारी घाटे में चल रही थी। इन नुकसानों को छिपाने और बाज़ार में अपनी साख बनाए रखने के लिए, कंपनी नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को ब्याज चुकाने में कर रही थी। एजेंसी ने पाया कि इस तरह जुटाई गई रकम को निजी खातों, परिवार के सदस्यों और शिवम सेवा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड व शिवम प्रोडक्शंस जैसी सहयोगी कंपनियों के ज़रिए घुमाया गया।

फिल्में बनाने और लग्ज़री गाड़ियों पर खर्च हुई रकम

आरोप है कि निवेशकों से धोखाधड़ी कर जुटाई गई इस रकम का इस्तेमाल लग्जरी गाड़ियां खरीदने, महंगे बंगले बनवाने, दूसरों के नाम पर संपत्तियां खरीदने और यहां तक कि फिल्में बनाने में भी किया गया। ED ने इस पैसे को पीएमएलए के तहत 'अपराध से अर्जित आय' माना है और मामले में आगे की जांच जारी है ताकि पूरी धोखाधड़ी और पैसे के लेन-देन का पता लगाया जा सके।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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