रविवार, 5 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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एथेनॉल ब्लेंडिंग: भारत ने कच्चे तेल का आयात घटाकर कैसे बचाए ₹1.90 लाख करोड़?

भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर पिछले करीब एक दशक में विदेशी मुद्रा भंडार में 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत की है। यह कार्यक्रम न सिर्फ देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि किसानो

एथेनॉल ब्लेंडिंग: भारत ने कच्चे तेल का आयात घटाकर कैसे बचाए ₹1.90 लाख करोड़?
(फोटो: IANS)

भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर पिछले करीब एक दशक में विदेशी मुद्रा भंडार में 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत की है। यह कार्यक्रम न सिर्फ देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा जारी एक फैक्टशीट में इन तथ्यों को उजागर किया गया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.5% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और आपूर्ति की अनिश्चितताओं के प्रति संवेदनशील हो जाती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को एक रणनीतिक समाधान के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। गन्ना, मक्का और चावल जैसे घरेलू कृषि उत्पादों से बना एथेनॉल इस निर्भरता को कम करने का एक प्रभावी तरीका प्रदान करता है।

विदेशी मुद्रा बचत से लेकर किसानों की आय तक

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 तक की अवधि में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम (EBP) के माध्यम से 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल को बदला गया। इस कदम से देश को सीधे तौर पर 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली।

इतना ही नहीं, इस कार्यक्रम का सीधा लाभ किसानों को भी मिला है। इस दौरान किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी हुई। साथ ही, इसने 930 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा कार्बन उत्सर्जन को कम करके पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

एथेनॉल मिश्रण एक वैश्विक चलन

फैक्टशीट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि एथेनॉल का मिश्रण सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक प्रथा बन चुकी है। अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसी दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इसे अपना रही हैं।

विभिन्न देशों में स्थिति:

  • अमेरिका: यहां E10 (10% एथेनॉल मिश्रण) एक मानक ईंधन है, जबकि E15 का उपयोग भी बढ़ रहा है। लाखों गाड़ियां E85 तक के मिश्रण पर चलने के लिए तैयार हैं।
  • ब्राजील: एथेनॉल के इस्तेमाल में यह देश दुनिया में सबसे आगे है, जहां E27 (27% मिश्रण) अनिवार्य है और इसे लगभग 35% तक बढ़ाने की योजना है। वहां बिकने वाली 80% से अधिक नई कारें फ्लेक्स-फ्यूल होती हैं।
  • जापान: इसने भी चरणबद्ध तरीके से E10 को लागू किया है।
  • अन्य देश: कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों ने भी अपनी स्वच्छ ऊर्जा रणनीतियों के तहत एथेनॉल ब्लेंडिंग को अपनाया है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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