रविवार, 5 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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अदाणी ग्रुप केस: अमेरिकी न्याय विभाग ने माना, 'यह मामला शुरू ही नहीं होना चाहिए था'

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदाणी ग्रुप के खिलाफ चल रहे एक हाई-प्रोफाइल मामले पर बेहद असामान्य रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग ने न केवल केस वापस लेने की अर्जी दी है

अदाणी ग्रुप केस: अमेरिकी न्याय विभाग ने माना, 'यह मामला शुरू ही नहीं होना चाहिए था'
(फोटो: IANS)

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदाणी ग्रुप के खिलाफ चल रहे एक हाई-प्रोफाइल मामले पर बेहद असामान्य रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग ने न केवल केस वापस लेने की अर्जी दी है, बल्कि एक विस्तृत कोर्ट फाइलिंग में यह भी स्वीकार किया है कि यह मुकदमा कभी शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था। यह कदम गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले समूह के लिए एक बड़ी राहत है, जो पिछले लगभग दो सालों से गंभीर अंतरराष्ट्रीय जांच और बाजार के उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है।

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4 जुलाई को दायर इस फाइलिंग में, DOJ ने अपने ही मुकदमे की कानूनी बुनियाद, अधिकार क्षेत्र और सबूतों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विभाग का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसी संस्था द्वारा अपने सबसे चर्चित कॉर्पोरेट मामलों में से एक का सार्वजनिक पुनर्मूल्यांकन है।

मामले में बुनियादी खामियां क्यों?

अमेरिकी न्याय विभाग ने अपने फैसले के पीछे कई ठोस कारण गिनाए हैं। विभाग का मानना है कि कथित गड़बड़ियां मुख्य रूप से भारत के अधिकार क्षेत्र में हुईं, क्योंकि इसमें भारतीय नागरिक, भारतीय सरकारी अधिकारी और भारतीय अनुबंध शामिल थे। DOJ ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय अधिकारी पहले ही इन आरोपों की जांच कर चुके हैं और उन्हें कार्रवाई योग्य कुछ भी नहीं मिला।

न्याय विभाग ने सिक्योरिटीज से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इन्हें "कभी नहीं लगाया जाना चाहिए था"। फाइलिंग में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन सिक्योरिटीज का मामला है, उनमें निवेशकों का "एक पैसा भी नहीं डूबा है"। या तो उनका पूरा भुगतान हो चुका है या वे अभी भी सही ढंग से काम कर रही हैं।

"नाम खराब करने की कोशिश"

DOJ ने पिछली अमेरिकी सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में आरोप-पत्र दाखिल करने के समय पर भी सवाल उठाया है। विभाग ने इसे "नाम खराब करने" की एक ऐसी कोशिश बताया, जिसे "मुकदमा चलने की किसी भी वास्तविक संभावना के बिना" अंजाम दिया गया था।

विभाग ने इस मुकदमे में "सबूतों से जुड़ी असाधारण मुश्किलों" और प्रॉसिक्यूशन की "कई बड़ी खामियों" को भी स्वीकार किया। न्याय विभाग ने स्पष्ट किया कि केस खत्म करने का फैसला किसी भी तरह के संभावित अमेरिकी निवेश से प्रभावित नहीं है, बल्कि यह अभियोजकों और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है।

हालांकि, अदालत ने अभी तक मामला खारिज करने की अर्जी पर अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन अमेरिकी न्याय विभाग का यह स्पष्टीकरण इस मामले की दिशा को पूरी तरह से बदल सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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