गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी पर दाखिले में भेदभाव का आरोप, अमेरिकी न्याय विभाग ने जाँच में पाया उल्लंघन

अमेरिका के न्याय विभाग ने अपनी एक जाँच के बाद ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज पर प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर भेदभाव का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विभाग का कहना है कि कॉलेज ने…

ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी पर दाखिले में भेदभाव का आरोप, अमेरिकी न्याय विभाग ने जाँच में पाया उल्लंघन
(फोटो: IANS)

अमेरिका के न्याय विभाग ने अपनी एक जाँच के बाद ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज पर प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर भेदभाव का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विभाग का कहना है कि कॉलेज ने एशियाई और श्वेत आवेदकों की तुलना में अश्वेत उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुँचाया, जो संघीय नागरिक अधिकार कानून का उल्लंघन है।

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यह जाँच 2023, 2024 और 2025 की प्रवेश कक्षाओं से जुड़े मामलों पर केंद्रित थी। न्याय विभाग के सिविल राइट्स डिवीजन ने पाया कि कॉलेज की दाखिला प्रणाली अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 2023 के उस फैसले के भी खिलाफ है, जिसमें विश्वविद्यालयों में नस्ल के आधार पर दाखिले पर रोक लगाई गई थी।

जाँच के मुख्य निष्कर्ष

जाँच में यह बात सामने आई कि स्क्रीनिंग और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी करने वाले अश्वेत आवेदकों के चुने जाने की संभावना, समान योग्यता वाले एशियाई उम्मीदवारों की तुलना में लगभग 2.8 गुना ज़्यादा थी। विभाग ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में एक समानांतर प्रवेश प्रक्रिया चल रही थी, जिसके तहत कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को बिना सामान्य जाँच या इंटरव्यू के ही दाखिला दे दिया गया।

विभाग के मुताबिक, कॉलेज ने अल्प-प्रतिनिधित्व वाले अल्पसंख्यक समुदायों से अधिक छात्रों को प्रवेश देने के लिए एक 'होलिस्टिक अप्रोच' अपनाई थी। इस प्रणाली में उम्मीदवारों का मूल्यांकन तीन श्रेणियों में होता था: गुण (अधिकतम 12 अंक), अनुभव (अधिकतम 16 अंक), और मेट्रिक्स (अधिकतम 8 अंक), जिसके बाद इंटरव्यू का चरण आता था।

"नस्ल के आधार पर अलग प्रक्रिया गैरकानूनी"

सिविल राइट्स डिवीजन की प्रमुख और सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "किसी भी विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया और उसके सभी चरण सभी आवेदकों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, चाहे उनकी नस्ल कुछ भी हो।" उन्होंने आगे कहा, "नस्ल के आधार पर अलग प्रवेश प्रक्रिया चलाना संघीय कानून के तहत स्पष्ट रूप से गैरकानूनी है। यह विभाग ऐसी प्रथाओं को ओएसयू मेडिकल कॉलेज या किसी अन्य संघीय धन प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान में जारी नहीं रहने देगा।"

न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये जाँच के निष्कर्ष हैं, न कि अदालत का फैसला। विभाग पहले समझौते के माध्यम से कॉलेज को नियमों के अनुरूप लाने का प्रयास करेगा। यदि यह प्रयास विफल रहता है, तो मुकदमा दायर किया जा सकता है। विभाग ने यह भी कहा कि वह अन्य मेडिकल स्कूलों द्वारा संघीय भेदभाव-रोधी नियमों के पालन की जाँच जारी रखेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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