रविवार, 23 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

दिल्ली: खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला से जुड़े ड्रग्स-आतंकी गठजोड़ का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसके तार खालिस्तानी आतंकवादी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े हैं। इस मामले में पुलिस ने कुल…

दिल्ली: खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला से जुड़े ड्रग्स-आतंकी गठजोड़ का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार
(फोटो: IANS)

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसके तार खालिस्तानी आतंकवादी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े हैं। इस मामले में पुलिस ने कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह गिरोह भारत से अफीम खरीदकर कनाडा भेजता था और फिर ड्रग्स की कमाई से हथियारों की खरीद और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग करता था।

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मामले का खुलासा तब हुआ जब 7 फरवरी को क्राइम ब्रांच को एक खुफिया जानकारी मिली। इसके आधार पर, दिल्ली के मोती नगर स्थित एक कूरियर कंपनी से कनाडा भेजे जा रहे पार्सल को रोका गया। पार्सल में घरेलू खाने-पीने की चीजों के नीचे खास तौर पर बनाए गए नकली बॉटम में 2.998 किलोग्राम अफीम छिपाई गई थी।

जांच में हुआ पूरे नेटवर्क का खुलासा

जांचकर्ताओं ने इसे एक सामान्य ड्रग्स बरामदगी न मानकर पूरे सिंडिकेट की पड़ताल शुरू की। कूरियर चेन की जांच, डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल से एक बड़े संगठित नेटवर्क का पता चला। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कई जगहों पर छापेमारी की गई। इस दौरान कनाडा जा रहे दो और पार्सल जब्त किए गए, जिनसे क्रमशः 921 ग्राम और 1,196 ग्राम अफीम मिली। इसके अलावा, एक आरोपी सिमरनजीत सिंह के पास से 23 ग्राम अफीम भी बरामद की गई। कुल मिलाकर 5.138 किलोग्राम अफीम जब्त की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपए आंकी गई है।

मुनाफे से होती थी टेरर फाइनेंसिंग

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह भारत में करीब 1.5 लाख रुपए प्रति किलो में अफीम खरीदता था। कनाडा के बाजार में यही अफीम 50 से 100 कैनेडियन डॉलर प्रति ग्राम में बेची जाती थी, जिससे तस्करों को खरीद मूल्य से 20 से 40 गुना तक मुनाफा होता था। क्राइम ब्रांच का आरोप है कि इस भारी मुनाफे का एक हिस्सा आतंकी अर्श डल्ला और उसके गिरोह की आपराधिक गतिविधियों को फाइनेंस करने में इस्तेमाल किया जाता था, जबकि कुछ पैसा विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेजा जाता था।

अत्याधुनिक तरीकों का इस्तेमाल

पुलिस जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट पकड़ से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाता था। ड्रग्स की खरीद एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन पर साझा किए गए जीपीएस कोऑर्डिनेट के जरिए की जाती थी। पार्सल में अफीम को सिल्वर फॉइल से बने नकली बॉटम या कपड़ों के अंदर छिपाया जाता था। कूरियर बुक करने के लिए फर्जी केवाईसी दस्तावेजों और अनजान लोगों के नाम का इस्तेमाल किया जाता था। क्राइम ब्रांच का कहना है कि अर्श डल्ला सहित विदेश में बैठे साजिशकर्ताओं और पंजाब में सक्रिय उसके साथियों के खिलाफ जांच जारी है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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