बांग्लादेश में साइबर अपराध की चिंताजनक तस्वीर, 97% पीड़ित महिलाएं और बच्चे
बांग्लादेश में डिजिटल तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल अपने साथ साइबर अपराध का एक गंभीर खतरा लेकर आया है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाएं और बच्चे भुगत रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…
बांग्लादेश में डिजिटल तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल अपने साथ साइबर अपराध का एक गंभीर खतरा लेकर आया है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाएं और बच्चे भुगत रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में साइबर अपराधों के कुल पीड़ितों में से लगभग 97 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं। ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क किशोरों को विशेष रूप से अपना निशाना बना रहे हैं।
पुलिस मुख्यालय और खुफिया सूत्रों का हवाला देते हुए स्थानीय मीडिया ने बताया कि अपराधी बैंकिंग और वित्तीय जानकारी चुराकर आर्थिक धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। बड़ी मात्रा में धन को ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े मोबाइल फाइनेंशियल सर्विस (MFS) खातों के माध्यम से ट्रांसफर किया जा रहा है।
कानून और शिकायत की स्थिति
कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आई है कि देश में साइबर अपराध चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली अखबार 'डेली सन' के अनुसार, पुलिस जांच में यह भी पाया गया कि हर पांच में से तीन लड़कियों और युवतियों को किसी न किसी रूप में साइबर बुलिंग का सामना करना पड़ा है।
हालांकि, सामाजिक बदनामी के डर से इनमें से करीब 89 प्रतिशत पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते। जिन मामलों में शिकायत होती भी है, उनमें से लगभग 72 प्रतिशत का समाधान नहीं हो पाता या उन्हें सबूतों की कमी के कारण बंद कर दिया जाता है। पिछले पांच वर्षों के पुलिस आंकड़ों के अनुसार, सूचना और अश्लीलता नियंत्रण अधिनियम-2012, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अधिनियम-2006 और डिजिटल सुरक्षा अधिनियम-2018 के तहत कुल 4,794 मामले दर्ज किए गए हैं।
शीर्ष अधिकारियों की चिंता
बांग्लादेश के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) अली हुसैन फकीर ने साइबर अपराध और ऑनलाइन अफवाहों के प्रसार को कानून-व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना है। हाल ही में शारदा पुलिस अकादमी में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "ऑनलाइन गैम्बलिंग, फिशिंग और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है।" विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों की जांच और निपटारे के लिए एक समर्पित इकाई की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
यह स्थिति 'साइबर सपोर्ट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन' प्लेटफॉर्म की एक रिपोर्ट से भी स्पष्ट होती है, जिसमें जनवरी 2025 (यह तारीख स्रोत के अनुसार है) से 29 मामलों के विश्लेषण के आधार पर बताया गया कि पिछले वर्ष के पहले छह महीनों में साइबर हिंसा के 97 प्रतिशत शिकार महिलाएं और बच्चे थे।
इनपुट: IANS



