गुरूवार, 3 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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केरल चुनाव में हार: CPI(M) में बगावत के सुर, वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व पर उठाए सवाल

केरल में चुनावी हार के बाद सत्ताधारी रही CPI(M) के भीतर घमासान तेज हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री थॉमस आइजैक और एक पूर्व नेता टी.के. गोविंदन ने शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर…

केरल चुनाव में हार: CPI(M) में बगावत के सुर, वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व पर उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

केरल में चुनावी हार के बाद सत्ताधारी रही CPI(M) के भीतर घमासान तेज हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री थॉमस आइजैक और एक पूर्व नेता टी.के. गोविंदन ने शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे पार्टी में अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह खींचतान ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी अगले सप्ताहांत से शुरू होने वाली अपनी विस्तारित राज्य समिति की बैठक की तैयारी कर रही है।

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वरिष्ठ नेता थॉमस आइजैक ने गुरुवार को कहा कि चुनावी हार पर उनकी आलोचनात्मक टिप्पणी पार्टी की केंद्रीय समिति की रिपोर्ट पर आधारित है और वह अपने बयान पर पूरी तरह कायम हैं। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि दस साल सत्ता में रहने के कारण पार्टी और कार्यकर्ताओं में अहंकार आ गया था, जो संगठन के भीतर पहले से ही एक बहस का मुद्दा था।

नेतृत्व को सीधी चुनौती

पार्टी नेतृत्व पर सबसे तीखा हमला टी.के. गोविंदन ने किया है, जिन्होंने CPI(M) से नाता तोड़कर तालिपारम्बा विधानसभा सीट से बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के समर्थन से उन्होंने CPI(M) की आधिकारिक उम्मीदवार पी.के. श्यामला को हराया, जो पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की पत्नी हैं।

गोविंदन ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और पार्टी नेतृत्व को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें चुनावी हार में हुई गलतियों को खुले तौर पर स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने विजयन के करीबी माने जाने वाले कन्नूर जिला सचिव के.के. रागेश पर भी निशाना साधा और उनकी संपत्ति की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि रागेश ने एक प्लंबर/इलेक्ट्रीशियन के रूप में पार्टी में शुरुआत की थी।

आंतरिक बहस और सोशल मीडिया

इस बीच, CPI(M) समर्थित कैराली टीवी के एक वरिष्ठ पत्रकार शैमी प्रभाकर की एक फेसबुक पोस्ट ने भी पार्टी समर्थकों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। पोस्ट में पिछले दस साल के वामपंथी शासन की प्रशंसा तो की गई है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की गई है कि वह हालिया चुनावी झटके की गंभीरता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।

अब सभी की नजरें पार्टी की आगामी राज्य समिति की बैठक पर टिकी हैं, जहां राज्य सचिवालय और राज्य समिति को उन राजनीतिक और संगठनात्मक सवालों की पहचान करनी है जिन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये आलोचनाएं एक व्यापक संगठनात्मक समीक्षा का रूप लेंगी या केवल चुनाव के बाद के असंतोष के रूप में ही सीमित रह जाएंगी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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