मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कपास: भारत का 'सफ़ेद सोना' कैसे बन रहा वैश्विक ताकत, जानें उत्पादन से निर्यात तक की पूरी कहानी

भारत में कपास को यूँ ही 'सफ़ेद सोना' नहीं कहा जाता। यह न केवल देश के लगभग 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है, बल्कि वैश्विक कपड़ा बाज़ार में भी भारत की धाक जमा रहा है। समाचार एजेंसी IANS द्वारा…

कपास: भारत का 'सफ़ेद सोना' कैसे बन रहा वैश्विक ताकत, जानें उत्पादन से निर्यात तक की पूरी कहानी
(फोटो: IANS)

भारत में कपास को यूँ ही 'सफ़ेद सोना' नहीं कहा जाता। यह न केवल देश के लगभग 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है, बल्कि वैश्विक कपड़ा बाज़ार में भी भारत की धाक जमा रहा है। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, वैश्विक फाइबर उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो इसकी आर्थिक अहमियत को दर्शाता है।

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रकबे के लिहाज़ से भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा क्षेत्र में कपास की खेती करता है, जबकि उत्पादन और खपत के मामले में यह दूसरे स्थान पर है। देशभर में लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर इसकी खेती होती है। यह सिर्फ़ किसानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कपास की प्रोसेसिंग, व्यापार और इससे जुड़े दूसरे कामों से भी 4 से 5 करोड़ लोगों को रोज़गार मिलता है।

उत्पादन और खपत के आँकड़े

वित्त वर्ष 2025-26 के आँकड़े बताते हैं कि देश में कपास का उत्पादन 290.91 लाख गांठ रहा, जबकि इसी दौरान घरेलू खपत 328 लाख गांठ तक पहुँच गई। सरकार ने इस अंतर को पाटने और उत्पादन को और बढ़ाने के लिए 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन' शुरू किया है। इस मिशन का लक्ष्य साल 2031 तक कपास उत्पादन को 498 लाख गांठ (बेल) तक पहुँचाना है।

किसानों को सरकारी समर्थन

सरकार कपास किसानों की मदद के लिए कई कदम उठा रही है। जब बाज़ार में कीमतें गिरती हैं, तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत सरकारी खरीद किसानों को आर्थिक सुरक्षा देती है। इसके अलावा, बेहतर तकनीक, डिजिटल खरीद प्रणाली और ट्रेसबिलिटी (यानी उत्पाद के स्रोत का पता लगाना) जैसी पहलों से भारतीय कपास की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत किया जा रहा है। इन प्रयासों का मुख्य ज़ोर उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और बाज़ार तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करने पर है।

वैश्विक बाज़ार में भारत की स्थिति

कपास सिर्फ़ घरेलू ज़रूरतें ही पूरी नहीं करता, बल्कि यह विदेशी मुद्रा कमाने का भी एक बड़ा ज़रिया है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अनुमानित 18 लाख गांठ कपास का निर्यात किया, जो वैश्विक निर्यात का लगभग 3.37 प्रतिशत है। मूल्य के हिसाब से देखें तो यह निर्यात 11.49 अरब डॉलर का था।

भारतीय कपास से बने कपड़ों और अन्य उत्पादों का सबसे बड़ा ख़रीदार अमेरिका है, जिसकी कुल निर्यात में 26.35% हिस्सेदारी है। इसके बाद बांग्लादेश (19.81%), श्रीलंका (5.11%), यूनाइटेड किंगडम (2.38%) और संयुक्त अरब अमीरात (2.32%) का स्थान आता है।

प्रमुख कपास उत्पादक राज्य

भारत में कपास का उत्पादन मुख्य रूप से 9 राज्यों में होता है, जिन्हें तीन कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों में बाँटा गया है।

  • उत्तरी क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान
  • मध्य क्षेत्र: गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश
  • दक्षिणी क्षेत्र: तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक
इनके अलावा ओडिशा और तमिलनाडु में भी कपास की खेती की जाती है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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