महाराष्ट्र: MPSC की कंप्यूटर आधारित परीक्षा 2027 तक स्थगित, पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था ही रहेगी जारी
महाराष्ट्र में लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने MPSC की प्रस्तावित कंप्यूटर-आधारित परीक्षा प्रणाली को अगस्त 2027 तक टालने का फैसला
महाराष्ट्र में लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने MPSC की प्रस्तावित कंप्यूटर-आधारित परीक्षा प्रणाली को अगस्त 2027 तक टालने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को यह घोषणा की, जिसके बाद यह तय हो गया है कि तब तक सभी परीक्षाएं पहले की तरह पेन और पेपर आधारित ऑफलाइन तरीके से ही होती रहेंगी।
यह अहम निर्णय छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन और चिंताओं को देखते हुए लिया गया है। जून 2026 के अंत में MPSC ने अचानक घोषणा की थी कि ग्रुप-सी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा से शुरू होकर, परीक्षाएं कंप्यूटर पर आधारित (CBT) होंगी। आयोग का मकसद पेपर लीक रोकना और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना था। लेकिन इस घोषणा के बाद पुणे और छत्रपति संभाजीनगर समेत कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छात्रों की चिंताएं और सरकार का हस्तक्षेप
छात्र संगठनों का तर्क था कि ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय डिजिटल परीक्षा केंद्रों की कमी है, जिससे उन्हें बड़े शहरों की ओर भागना पड़ेगा। साथ ही, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के कई छात्र कंप्यूटर आधारित टेस्ट के लिए तैयार नहीं थे और उन्हें सर्वर फेल होने व तकनीकी गड़बड़ियों का भी डर था। इन चिंताओं को देखते हुए सरकार ने हस्तक्षेप किया।
मुंबई के मंत्रालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इसी बैठक में नई प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला हुआ। सरकार ने कहा कि इस फैसले से छात्रों और प्रशासन, दोनों को नई व्यवस्था के लिए तैयार होने का पर्याप्त समय मिलेगा।
पारदर्शी परीक्षा पहली प्राथमिकता: मुख्यमंत्री
इस मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सुरक्षित और पारदर्शी चयन प्रक्रिया उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "परीक्षा समय पर हो, पूरी पारदर्शिता के साथ हो और परिणाम भी जल्द घोषित किए जाएं। लेकिन किसी भी नई व्यवस्था में बदलाव धीरे-धीरे और पूरी तैयारी के साथ होना चाहिए।" उन्होंने माना कि अचानक बदलाव से अभ्यर्थियों पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार ने आयोग को इस फैसले को लागू करने और अगले 13 महीनों में राज्य भर में मजबूत डिजिटल परीक्षा केंद्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान छात्र भी नई प्रणाली के लिए खुद को मानसिक और रणनीतिक रूप से तैयार कर सकेंगे।
इनपुट: IANS



