केरल: समुद्री जैव विविधता के संरक्षण में टूरिस्ट गाइड निभाएंगे अहम भूमिका, CMFRI ने दी विशेष ट्रेनिंग
केरल की समुद्री संपदा और तटीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए एक अनूठी पहल की गई है, जिसके तहत टूरिस्ट गाइडों को वैज्ञानिक जानकारी से लैस किया जा रहा है। अब राज्य के प्रसिद्ध समुद्र तटों और बैकवॉटर्स…
केरल की समुद्री संपदा और तटीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए एक अनूठी पहल की गई है, जिसके तहत टूरिस्ट गाइडों को वैज्ञानिक जानकारी से लैस किया जा रहा है। अब राज्य के प्रसिद्ध समुद्र तटों और बैकवॉटर्स पर आने वाले पर्यटक सिर्फ खूबसूरत नज़ारे ही नहीं, बल्कि समुद्री जीवन, नाजुक इकोसिस्टम और पारंपरिक मत्स्य पालन की विरासत के बारे में भी प्रामाणिक जानकारी हासिल कर सकेंगे।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कार्यक्रम विज्ञान और पर्यटन को एक साथ लाने वाला एक नया सामुदायिक जुड़ाव मॉडल है। इसका उद्देश्य पर्यटन को पर्यावरण जागरूकता और टिकाऊ यात्रा के लिए एक मजबूत माध्यम बनाना है। इस पहल का नेतृत्व आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) कर रहा है, जो गाइडों को "समुद्री संरक्षण के दूत" के रूप में तैयार कर रहा है।
विज्ञान और पर्यटन का संगम
सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा, "टूरिस्ट गाइड हर साल हजारों पर्यटकों से मिलते हैं और वे हमारे समुद्री इकोसिस्टम को बचाने और सस्टेनेबल फिशरीज को बढ़ावा देने की अहमियत बताने के लिए सबसे सही लोग हैं। उन्हें वैज्ञानिक जानकारी देकर हम समुद्री संरक्षण के संदेशों को आम जागरूकता कार्यक्रमों से कहीं आगे तक पहुंचा रहे हैं।"
संस्थान द्वारा पिछले साल शुरू किए गए लोकप्रिय 'फिश वॉक' आउटरीच प्रोग्राम के विस्तार के रूप में इस प्रशिक्षण को डिजाइन किया गया है। इसका लक्ष्य गाइडों को संरक्षण के बारे में प्रभावी ढंग से जानकारी देने वाला बनाना है, ताकि वे पर्यटकों के साथ सटीक वैज्ञानिक तथ्य साझा कर सकें।
प्रशिक्षण और प्रमाणन
इस पहल के तहत सरकार द्वारा प्रमाणित चौबीस टूरिस्ट गाइडों ने एक गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कोच्चि की मेयर वी. के. मिनिमोले ने प्रतिभागियों को कोर्स पूरा करने का प्रमाण पत्र प्रदान किया।
इस ट्रेनिंग में सैद्धांतिक कक्षाओं के साथ-साथ प्रैक्टिकल अनुभव पर भी जोर दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान केरल के विभिन्न तटीय और समुद्री इकोसिस्टम जैसे समुद्र तट, मैंग्रोव, बैकवॉटर्स और चट्टानी रीफ्स को कवर किया गया। इसके अलावा, गाइडों ने चेलानम फिशिंग हार्बर, पुथेथोडु बीच, कोट्टापुरम फिश केज फार्म और पनम्बुकड मैंग्रोव का दौरा भी किया, जिससे उन्हें टिकाऊ मछली पकड़ने के तरीकों और एक्वाकल्चर की सीधी जानकारी मिली।
इनपुट: IANS



