कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला: बंगाल में नेता प्रतिपक्ष बने रहेंगे ऋतब्रत बनर्जी, मामला एकल पीठ को लौटा
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा, इस पर चल रहा राजनीतिक और कानूनी विवाद फिलहाल थम गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले को वापस एकल पीठ के पास भेज दिया है…
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा, इस पर चल रहा राजनीतिक और कानूनी विवाद फिलहाल थम गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले को वापस एकल पीठ के पास भेज दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के साथ ही तृणमूल कांग्रेस से निकाले जा चुके विधायक ऋतब्रत बनर्जी अगले दो महीने तक इस पद पर बने रहेंगे।
न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के उस निर्णय में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी थी। हालांकि, अदालत ने यह साफ कर दिया है कि एकल पीठ के अंतिम फैसले तक बनर्जी की नियुक्ति को ‘अस्थायी’ ही माना जाएगा। खंडपीठ ने एकल पीठ को दो महीने के भीतर इस मामले पर अंतिम निर्णय देने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के भीतर की खींचतान से जुड़ा है, जो हालिया विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ था। चुनाव में 80 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने वरिष्ठ विधायक सोवंदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला किया था और 9 मई को इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भी भेजा गया।
हालांकि, बाद में पार्टी में एक ‘विद्रोही’ गुट उभरकर सामने आया। 1 जून को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। इसके ठीक दो दिन बाद, 3 जून को, पार्टी के ‘विद्रोही लेकिन बहुमत’ वाले धड़े ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया और अध्यक्ष से उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की, जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया।
अदालत तक कैसे पहुंचा मामला
विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के इस फैसले के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के ‘मूल लेकिन अल्पमत’ गुट के नेता सोवंदेब चट्टोपाध्याय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले जून महीने में, न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने स्पीकर के फैसले को सही ठहराया था। इसी फैसले को चट्टोपाध्याय ने खंडपीठ में चुनौती दी थी, जिसने अब मामले को फिर से विचार के लिए एकल पीठ को सौंप दिया है।
इनपुट: IANS



