शोपियां: बच्चों की आत्महत्या से जुड़े मामलों में फोटो-वीडियो शेयर करने पर पाबंदी, उल्लंघन पर होगी सज़ा
जम्मू-कश्मीर के शोपियां में बच्चों द्वारा आत्महत्या के प्रयास से जुड़ी घटनाओं में उनकी पहचान उजागर करने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। एक हालिया मामले के बाद, जिला बाल संरक्षण प्राधिकरण (सीपीए) ने…
जम्मू-कश्मीर के शोपियां में बच्चों द्वारा आत्महत्या के प्रयास से जुड़ी घटनाओं में उनकी पहचान उजागर करने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। एक हालिया मामले के बाद, जिला बाल संरक्षण प्राधिकरण (सीपीए) ने बच्चों की तस्वीरें, सीसीटीवी फुटेज या कोई भी निजी जानकारी साझा करने पर रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कदम किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत बच्चों की गोपनीयता और गरिमा की रक्षा के लिए उठाया गया है।
मिशन वात्सल्य के तहत जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) द्वारा जारी इस आदेश का उद्देश्य अधिकारियों, मीडिया संगठनों और आम जनता को ऐसी संवेदनशील जानकारी फैलाने से रोकना है।
क्या-क्या जानकारी साझा करने पर है रोक?
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आत्महत्या के प्रयास से जुड़े किसी भी मामले में बच्चे की पहचान उजागर करने वाली कोई भी सामग्री प्रकाशित या सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इसमें निम्नलिखित जानकारियां शामिल हैं:
- बच्चे का नाम, पता, स्कूल या माता-पिता का विवरण
- तस्वीरें, वीडियो या स्क्रीनशॉट
- व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर केस रिकॉर्ड, मेडिकल जानकारी या बयान
इसके अलावा, घटना से जुड़े किसी भी सीसीटीवी फुटेज को भी पूरी तरह गोपनीय रखने का निर्देश दिया गया है। इसे केवल जांच या न्यायिक कार्यवाही के लिए सक्षम अधिकारियों को ही सौंपा जा सकता है।
नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?
यह आदेश किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 पर आधारित है, जो कानूनी प्रक्रिया में शामिल बच्चों की पहचान की सुरक्षा करता है। इस नियम का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद, दो लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। प्राधिकरण ने मीडिया संस्थानों से भी अपील की है कि वे इस तरह की घटनाओं की रिपोर्टिंग करते समय सनसनी फैलाने से बचें और भारतीय प्रेस परिषद के मानदंडों का पालन करें।
इनपुट: IANS



