इनकम टैक्स पोर्टल पर अब दिखेगी आपकी विदेशी संपत्ति, CBDT ने टैक्सपेयर्स के लिए शुरू की नई सुविधा
अगर आपकी कोई संपत्ति या आय का स्रोत विदेश में है, तो अब उससे जुड़ी जानकारी आपको सीधे इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर ही दिख जाएगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने करदाताओं के लिए एनुअल…
अगर आपकी कोई संपत्ति या आय का स्रोत विदेश में है, तो अब उससे जुड़ी जानकारी आपको सीधे इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर ही दिख जाएगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने करदाताओं के लिए एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में यह नई सुविधा शुरू की है, ताकि वे अपना इनकम टैक्स रिटर्न आसानी से और सही-सही भर सकें। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम का मकसद स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देना है, न कि करदाताओं की जांच करना।
यह जानकारी भारत को ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन (AEOI) व्यवस्था के तहत मिलती है। भारत ने दुनिया के 100 से अधिक देशों के साथ वित्तीय जानकारी के आदान-प्रदान के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते किए हैं। इन्हीं समझौतों के तहत हर साल भारतीय टैक्स निवासियों (Tax Residents) की विदेश में मौजूद वित्तीय संपत्तियों और आय का डेटा भारत को मिलता है।
आपको पोर्टल पर क्या जानकारी दिखेगी?
इस सुविधा के तहत आपको साझेदार देशों से मिली जानकारी दिखाई देगी। इसमें विदेशी बैंक खाते, कस्टोडियल खाते, कुछ खास तरह के वित्तीय निवेश, ब्याज, डिविडेंड और अन्य निर्धारित वित्तीय आय शामिल हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि AEOI के तहत पिछले कैलेंडर वर्ष की जानकारी हर साल सितंबर से मिलनी शुरू होती है। फिलहाल, पोर्टल पर कैलेंडर वर्ष 2022, 2023 और 2024 से जुड़ी उपलब्ध जानकारी को अपडेट कर दिया गया है।
क्या यह जानकारी अंतिम है?
CBDT ने यह साफ किया है कि AIS में दिख रही जानकारी सिर्फ वही है, जो साझेदार देशों से मिली है। इसे आपकी कुल विदेशी संपत्ति और आय का पूरा रिकॉर्ड नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए, करदाताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने इनकम टैक्स रिटर्न के शेड्यूल एफए (Schedule FA) और शेड्यूल एफएसआई (Schedule FSI) में अपनी सभी विदेशी संपत्तियों और आय का पूरा और सही विवरण दें, भले ही वह जानकारी AIS में दिख रही हो या नहीं।
कैसे देखें यह जानकारी?
स्टेप 1: इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने अकाउंट में लॉगिन करें।
स्टेप 2: AIS सेक्शन में जाकर कंप्लायंस पोर्टल खोलें।
स्टेप 3: 'रिपोर्ट्स' विकल्प पर क्लिक करके 'फॉरेन एसेट्स इन्फॉर्मेशन' चुनें।
स्टेप 4: संबंधित कैलेंडर वर्ष का चयन करें और PDF डाउनलोड करके पूरी जानकारी देखें।
बोर्ड का कहना है कि यह सुविधा पूरी तरह से करदाताओं के हित में है। इससे उन्हें रिटर्न भरते समय अनजाने में होने वाली गलतियों से बचने में मदद मिलेगी और टैक्स अनुपालन अधिक सरल व पारदर्शी बनेगा। विभाग इस बारे में करदाताओं को SMS और ई-मेल के जरिए भी सूचित कर रहा है। साथ ही, करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल पर मौजूद AI-आधारित वर्चुअल असिस्टेंट 'कर साथी' से भी मदद ले सकते हैं।
इनपुट: IANS



