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पश्चिम बंगाल: कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना लाइसेंस नहीं बिकेंगे जानवर

पश्चिम बंगाल में जानवरों की बिक्री को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि राज्य में बिना वैध लाइसेंस के जानवरों की बिक्री नहीं की जा सकती। यह…

पश्चिम बंगाल: कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना लाइसेंस नहीं बिकेंगे जानवर
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में जानवरों की बिक्री को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि राज्य में बिना वैध लाइसेंस के जानवरों की बिक्री नहीं की जा सकती। यह निर्देश कोलकाता की प्रसिद्ध गैलिफ स्ट्रीट मार्केट समेत राज्य के सभी पशु बाजारों पर लागू होगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने यह भी कहा कि व्यापार केवल वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 और अन्य संबंधित कानूनों के दायरे में ही किया जा सकेगा।

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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की खंडपीठ ने एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि केवल उन्हीं व्यापारियों को जानवरों की बिक्री की अनुमति दी जाए जिनके पास वैध लाइसेंस हैं।

व्यापारियों और सरकार के तर्क

सुनवाई के दौरान गैलिफ स्ट्रीट के व्यापारियों के वकील ने दलील दी कि उनके कारोबार के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है और 600 से अधिक व्यापारी कई वर्षों से यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जानवरों की किसी भी दुर्लभ प्रजाति की बिक्री नहीं हो रही है। दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील सैकत बनर्जी ने अदालत को बताया कि बाजार में किसी भी व्यापारी के पास राज्य पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी किया गया लाइसेंस नहीं है।

व्यापारियों के वकील ने पुलिस पर व्यावसायिक गतिविधियां रोकने का आरोप लगाते हुए अगले रविवार को कारोबार जारी रखने की अंतरिम अनुमति मांगी। उन्होंने तर्क दिया कि सजावटी मछलियों, कुत्तों और पौधों की बिक्री पर कानूनी प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं।

अदालत की सख्त टिप्पणी

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने पाया कि व्यापारी बिना लाइसेंस के काम कर रहे थे और उन्होंने फुटपाथ पर भी कब्जा कर लिया था, जिससे आम लोगों को असुविधा हो रही थी। पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि इन पर कोई नियामक निगरानी क्यों नहीं थी। मुख्य न्यायाधीश घुगे ने आदेश दिया कि सभी व्यापारियों को पहले जरूरी लाइसेंस प्राप्त करना होगा। उन्होंने साफ किया कि पुलिस भी लाइसेंस देखने के बाद ही जानवरों की बिक्री की इजाजत देगी।

अदालत ने सभी पक्षों को इस मामले में 14 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इससे पहले 16 सितंबर को भी अदालत ने जानवरों की अवैध बिक्री रोकने के लिए राज्य भर के बाजारों पर कड़ी निगरानी का आदेश दिया था।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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