गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत में बायोगैस क्रांति: सरकार ने 23,731 करोड़ की ‘गोबरधन’ योजना को दी हरी झंडी

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव और सर्कुलर बायो-इकोनॉमी को सशक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय…

भारत में बायोगैस क्रांति: सरकार ने 23,731 करोड़ की ‘गोबरधन’ योजना को दी हरी झंडी
(फोटो: IANS)

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव और सर्कुलर बायो-इकोनॉमी को सशक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को 23,731 करोड़ रुपए के कुल बजट के साथ ‘गोबरधन’ (नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम) योजना पर मुहर लगा दी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाना और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करना है।

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यह योजना वित्तीय वर्ष 2027 से शुरू होकर 2036 तक लागू रहेगी, जिसका लक्ष्य सीबीजी को भारत के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का एक प्रमुख स्तंभ बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर निजी निवेश भी आकर्षित होगा।

उत्पादकों के लिए सुनिश्चित बाज़ार और कीमत

योजना के तहत, सीबीजी उत्पादकों को एक विश्वसनीय और अनुमानित बाज़ार उपलब्ध कराने के लिए एक समर्पित ‘सीबीजी ऑफटेक एश्योरेंस’ ढांचा स्थापित किया जाएगा। आधिकारिक बयान के मुताबिक, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों के लिए सीबीजी की खरीद अनिवार्य की जाएगी। इसके लिए चरणबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:

  • वित्त वर्ष 2027: सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) श्रेणियों में 3% सीबीजी मिश्रण।
  • वित्त वर्ष 2028: 4% सीबीजी मिश्रण।
  • वित्त वर्ष 2029 से आगे: 5% सीबीजी मिश्रण।

इसके अलावा, सरकार ने उत्पादकों को दीर्घकालिक राजस्व का भरोसा देने के लिए सीबीजी की प्रशासनिक कीमत 2,110 रुपए प्रति मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तय की है। यह मूल्य निर्धारण ढांचा कम से कम 10 वर्षों के लिए होगा, जिससे निवेश और क्षमता विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा।

वित्तीय सहायता और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

‘गोबरधन’ योजना के तहत नई (ग्रीनफील्ड) सीबीजी परियोजनाओं को वित्तीय मदद भी दी जाएगी। स्थापित सीबीजी क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (टीपीडी) पर 2 करोड़ रुपए तक की पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता केवल संयंत्र मशीनरी तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें फीडस्टॉक संग्रहण और जैविक खाद प्रसंस्करण जैसी संपत्तियां भी शामिल होंगी। मौजूदा संयंत्रों (ब्राउनफील्ड) को भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर यह लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही, सीबीजी संयंत्रों को मुख्य पाइपलाइनों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से जोड़ने के लिए क्लस्टर-आधारित पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी समर्थन दिया जाएगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित यह योजना ऋणदाताओं का भरोसा बढ़ाने के लिए एमएसएमई आधारित सीबीजी परियोजनाओं हेतु एक समर्पित क्रेडिट गारंटी तंत्र भी स्थापित करेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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