राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा को बहुमत, पर कई शहरों में निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी
राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन कई प्रमुख नगर निगमों में निर्दलीय पार्षदों ने निर्णायक भूमिका निभाई है। समाचार एजेंसी…
राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन कई प्रमुख नगर निगमों में निर्दलीय पार्षदों ने निर्णायक भूमिका निभाई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 301 घोषित निकायों में से भाजपा ने 197 में अपने बोर्ड बनाए, जबकि कांग्रेस को 94 पर जीत मिली। इस प्रदर्शन का श्रेय पार्टी नेता 'भजनलाल मॉडल' को दे रहे हैं, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सीधी भागीदारी अहम रही।
इन चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 35.18% रहा, जो कांग्रेस के 34.24% से केवल 0.94 प्रतिशत अंक अधिक है। वार्ड स्तर पर भी मुकाबला कड़ा रहा; कुल 10,235 वार्डों में से भाजपा ने 4,179, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 सीटें जीतीं। यह आँकड़े दिखाते हैं कि कई जगहों पर बोर्ड का गठन बिना निर्दलीयों के समर्थन के संभव नहीं था।
प्रमुख शहरों में रोचक सियासी समीकरण
चुनाव परिणामों ने कई शहरों में दिलचस्प राजनीतिक परिदृश्य पेश किया है। पाली और अजमेर नगर निगमों में पार्षद चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन दोनों ही जगहों पर भाजपा निर्दलीयों का समर्थन जुटाकर अपना मेयर बनाने में कामयाब रही। पाली में नमिता बुबाकिया और अजमेर में अनामिका शर्मा मेयर चुनी गईं।
भरतपुर का मामला और भी अनोखा रहा, जहाँ 65 वार्डों में से 36 पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत पा लिया। इसके बावजूद, भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुन ली गईं। वहीं, बीकानेर नगर निगम पर कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा, जहाँ उसके उम्मीदवार अनिल कल्ला ने भाजपा प्रत्याशी को हराया। उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी ने कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर मेयर पद पर जीत दर्ज की।
'भजनलाल मॉडल' और भाजपा की रणनीति
भाजपा नेता अपनी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सक्रिय भूमिका को दे रहे हैं। पार्टी के अनुसार, उम्मीदवार चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक, हर स्तर पर मुख्यमंत्री शामिल रहे। यह पहली बार था जब पार्टी ने राजस्थान के निकाय चुनावों में रोड-शो जैसे प्रचार मॉडल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। भाजपा का दावा है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति सफल रही।
पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गढ़ माने जाने वाले जोधपुर संभाग में अपने प्रदर्शन को विशेष रूप से रेखांकित किया है। यहाँ 41 में से 35 निकायों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया, जिसे पार्टी ने 87% की सफलता दर बताया है।
संभागवार स्थिति और आगामी चुनाव
पार्टी के आँकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने अधिकांश संभागों में बढ़त बनाई है। अजमेर संभाग में 52 में से 36, बीकानेर में 37 में से 24, उदयपुर में 28 में से 18, और कोटा में 28 में से 15 निकायों में बोर्ड बनाने का दावा किया गया है। मुख्यमंत्री के गृह जिले वाले भरतपुर संभाग में भी पार्टी ने 32 में से 24 निकायों में जीत की बात कही है। जयपुर संभाग में 91 में से 48 निकायों पर भाजपा और 40 पर कांग्रेस ने बोर्ड बनाया।
अभी भी राजस्थान के शहरी निकायों की अंतिम तस्वीर साफ होनी बाकी है। जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े नगर निगमों में मेयर पद के लिए चुनाव 25 सितंबर को होने हैं, जिसके बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
इनपुट: IANS



