कर्नाटक: ₹54 करोड़ की 'ग्रीन बेंगलुरु' योजना पर विवाद, BJP ने कांग्रेस सरकार पर लगाए विफलता के आरोप
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी 'ग्रीन बेंगलुरु' पहल पर विपक्षी भाजपा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई यह
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी 'ग्रीन बेंगलुरु' पहल पर विपक्षी भाजपा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई यह योजना उचित रखरखाव के अभाव में विफल हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा का दावा है कि देखभाल न होने के कारण हजारों पौधे सूख गए हैं।
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में चलाए गए एक बड़े शहरी वृक्षारोपण अभियान से जुड़ा है। इस अभियान का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान (अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव) को कम करना था। इसके तहत 27 जून को बेंगलुरु के संस्थापक नादप्रभु केंपेगौड़ा की 517वीं जयंती के अवसर पर महज़ 12 घंटों में 15 लाख पौधे लगाए गए थे, जिसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी जगह बनाई थी।
भाजपा के प्रमुख आरोप
वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने कथित तौर पर सूखे हुए पौधों की तस्वीरें साझा करते हुए सरकार पर क्रियान्वयन से ज़्यादा प्रचार को महत्व देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विज्ञापनों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रचार पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन परियोजना शुरू होने के बाद पौधों की देखभाल सुनिश्चित नहीं की गई।
अशोक ने आगे आरोप लगाया कि कई पौधों को बिना पर्याप्त सिंचाई और रखरखाव के नालों के किनारे छोड़ दिया गया, जिस कारण वे सूख गए। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने शासन को प्रभावी विकास कार्यों के बजाय 'फोटो अवसरों' तक सीमित कर दिया है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले बड़ी परियोजनाओं की घोषणा करती है, फिर प्रचार पर भारी खर्च करती है, लेकिन उनके उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित नहीं करती। अशोक ने सवाल किया, "यदि सरकार एक वृक्षारोपण कार्यक्रम का रखरखाव नहीं कर सकी, तो उस पर बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भरोसा कैसे किया जा सकता है?"
उन्होंने राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेतृत्व की भी आलोचना की और राज्य सरकार से पौधों के रखरखाव के लिए आवंटित धनराशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की। इसके साथ ही, भाजपा ने इस कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार की पहचान करने और अभियान की विफलता के लिए जवाबदेही तय करने की भी मांग रखी है। हालांकि, इन आरोपों पर कर्नाटक सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इनपुट: IANS



