कोलकाता भूमि घोटाला: गिरफ्तार कारोबारी जॉय कामदार ने सरकारी गवाह बनने की पेशकश की, कोर्ट ने ED से मांगा जवाब
कोलकाता के चर्चित भूमि हड़पने के मामले में एक अहम मोड़ आया है। इस मामले में गिरफ्तार रियल एस्टेट प्रमोटर जॉय कामदार ने सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की इच्छा जताई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
कोलकाता के चर्चित भूमि हड़पने के मामले में एक अहम मोड़ आया है। इस मामले में गिरफ्तार रियल एस्टेट प्रमोटर जॉय कामदार ने सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की इच्छा जताई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कामदार के वकील ने इस सिलसिले में कोलकाता की विशेष PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत में एक औपचारिक याचिका भी दायर की है, जहाँ इस केस की सुनवाई चल रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कामदार को इसी साल जमीन पर अवैध कब्जे के कई मामलों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
विशेष PMLA कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को कामदार की इस पेशकश पर अपना पक्ष रखने के लिए 25 अगस्त तक का समय दिया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्रीय जांच एजेंसी इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगी या नहीं, और क्या अदालत अंततः कामदार को सरकारी गवाह का दर्जा देगी। यदि कामदार की याचिका स्वीकार हो जाती है, तो उन्हें एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने गोपनीय बयान दर्ज कराना होगा, जो इस मामले के अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष के लिए एक मजबूत सबूत बन सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक कथित भूमि-हथियाने वाले गठजोड़ से जुड़ा है, जिसमें कारोबारी जॉय कामदार, भूमि माफिया सरगना बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता पुलिस के एक पूर्व उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास शामिल हैं। जांचकर्ताओं का दावा है कि इन तीनों ने मिलकर जमीन हड़पने की गतिविधियों से भारी मात्रा में अवैध धन कमाया। ईडी ने इस मामले में कामदार को अप्रैल में गिरफ्तार किया था, जबकि बिस्वास और पोद्दार को मई में हिरासत में लिया गया था।
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने इस अवैध कमाई को हवाला चैनलों के जरिए लेन-देन किया। जांच के दौरान कामदार के मलेशिया, ब्रिटेन और दुबई में मौजूद हवाला ऑपरेटरों से संपर्क के सबूत मिले हैं। इसके अलावा, बीरभूम जिले के बोलपुर-शांतिनिकेतन इलाके में कामदार और शांतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़ी कई अचल संपत्तियों का भी पता चला है, जिन्हें कथित तौर पर इसी बेहिसाब पैसे से खरीदा गया था। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी आरोपी का सरकारी गवाह बनना एक जटिल प्रक्रिया है और अंतिम निर्णय न्यायाधीश पर निर्भर करता है।
इनपुट: IANS



