मंत्री दीपक प्रकाश की MLC नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा नोटिफिकेशन, 20 अगस्त को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से राज्य के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद (MLC) का सदस्य नियुक्त करने संबंधी अधिसूचना पेश करने को कहा है। यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान…
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से राज्य के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद (MLC) का सदस्य नियुक्त करने संबंधी अधिसूचना पेश करने को कहा है। यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की वैधता को चुनौती दी गई थी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शुक्रवार को सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने अदालत को बताया कि दीपक प्रकाश को अब उच्च सदन के लिए नामित कर दिया गया है और उन्होंने शपथ भी ग्रहण कर ली है।
यह मामला इस विवाद से उपजा है कि दीपक प्रकाश राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य न होते हुए भी मंत्री पद पर बने हुए थे। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) किसी गैर-विधायक को अधिकतम छह महीने तक मंत्री बने रहने की अनुमति देता है, जिसके भीतर उसे किसी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। याचिकाकर्ता ने इसी प्रावधान के कथित उल्लंघन का सवाल उठाया था।
मामले की पृष्ठभूमि और संवैधानिक सवाल
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का तर्क था कि दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति अनुच्छेद 164(4) की भावना के खिलाफ है। प्रकाश को पहली बार 20 नवंबर, 2025 को बिहार कैबिनेट में शामिल किया गया था। बाद में, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने पर उन्हें 7 मई को फिर से पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया। याचिका में कहा गया कि इस दोबारा नियुक्ति का इस्तेमाल उन्हें मंत्री बने रहने के लिए अतिरिक्त छह महीने का समय देने के लिए नहीं किया जा सकता।
याचिका में एस.आर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2001 के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि यह संवैधानिक रियायत सिर्फ एक बार मिलती है और इसे इस्तीफे या कैबिनेट फेरबदल के जरिए बार-बार दोहराया नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि प्रकाश के MLC नामित हो जाने के बाद उनकी अयोग्यता का मुद्दा अब समाप्त हो गया है। उन्होंने बाद के घटनाक्रमों को देखते हुए मामले को बंद करने का आग्रह किया। हालांकि, याचिकाकर्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि कथित संवैधानिक उल्लंघन पहले ही हो चुका है और अपनाई गई प्रक्रिया की वैधता पर सवाल बना हुआ है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) और जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची व जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने राज्य सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए उनकी नियुक्ति से जुड़ा नोटिफिकेशन मांगा। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होने की संभावना है।
कैसे बने MLC?
विवाद उस समय और गहरा गया था जब हालिया MLC चुनावों के लिए एनडीए उम्मीदवारों में दीपक प्रकाश का नाम नहीं था। हालांकि, 31 जुलाई को भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे से एक सीट खाली हो गई, जिससे प्रकाश के राज्यपाल कोटे से विधान परिषद सदस्य बनने का रास्ता साफ हो गया। इसके बाद उन्हें नामित किया गया और उन्होंने शपथ ले ली।
इनपुट: IANS



