मंगलवार, 1 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट सिर्फ़ निर्माण नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलते हैं: गौतम अदाणी

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी का मानना है कि खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, मुंद्रा पोर्ट और विझिंजम पोर्ट जैसी बड़ी परियोजनाएं केवल ढांचे का निर्माण नहीं करतीं, बल्कि अपने आसपास की पूरी…

बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट सिर्फ़ निर्माण नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलते हैं: गौतम अदाणी
(फोटो: IANS)

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी का मानना है कि खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, मुंद्रा पोर्ट और विझिंजम पोर्ट जैसी बड़ी परियोजनाएं केवल ढांचे का निर्माण नहीं करतीं, बल्कि अपने आसपास की पूरी अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाती हैं। सोमवार को रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्रुप के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब एक ऐसे दौर में है, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्वरूप बदल चुका है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अदाणी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत को भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आज की मांग से कहीं आगे की सोचकर निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि देश की इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं पहले सीमित संसाधनों और आत्मविश्वास की कमी के कारण रुकी हुई थीं, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है।

नज़रिए से बदली तस्वीर: मुंद्रा और विझिंजम

अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए अदाणी ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि तीन दशक पहले पारंपरिक रेटिंग के हिसाब से इसे एक दलदली इलाका मानकर खारिज कर दिया गया होता, जहाँ कोई औद्योगिक इकोसिस्टम नहीं था। आज वही मुंद्रा न केवल भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है, बल्कि एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक गेटवे भी बन चुका है। इसके चारों ओर रेल, लॉजिस्टिक्स सेंटर, पावर प्लांट और औद्योगिक क्षेत्रों का एक विशाल इकोसिस्टम विकसित हुआ है, जो पूरे भारत के व्यापारियों और निर्माताओं को जोड़ता है।

इसी तरह, केरल के विझिंजम पोर्ट प्रोजेक्ट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 25 सालों तक किसी ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई, क्योंकि इसे बहुत मुश्किल और पूंजी के लिहाज़ से जोखिम भरा माना जाता था। अदाणी ने कहा कि इसके चलते दशकों तक भारतीय व्यापार को सिंगापुर, दुबई और कोलंबो जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ा। अदाणी समूह ने इस चुनौती को स्वीकार किया, जबकि यह बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल मील दूर है।

भविष्य का पावरहाउस: खावड़ा एनर्जी पार्क

गौतम अदाणी ने खावड़ा प्रोजेक्ट को भी पारंपरिक नज़रिए से परे देखने की बात कही। उन्होंने माना कि पहली नज़र में यह एक कठोर रेगिस्तान लगता है, जिसमें काम पूरा करने का जोखिम और मांग की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां हैं।

लेकिन उन्होंने समझाया, "खावड़ा सिर्फ एक रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट नहीं है। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक क्षमता अभूतपूर्व स्तर पर एक साथ आते हैं।" उनके मुताबिक, यह प्रोजेक्ट भारत के भविष्य के कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा देगा और देश की AI अर्थव्यवस्था की नींव का हिस्सा बन सकता है।

इनपुट: IANS

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