राजस्थान का 'राज्य पक्षी' गोडावण विलुप्ति के ख़तरे से बाहर, जंगल में वापसी का नया चरण शुरू
विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) यानी गोडावण को बचाने के प्रयासों में एक बड़ी कामयाबी मिली है। राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में संरक्षण और प्रजनन (कैप्टिव…
विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) यानी गोडावण को बचाने के प्रयासों में एक बड़ी कामयाबी मिली है। राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में संरक्षण और प्रजनन (कैप्टिव ब्रीडिंग) के ज़रिए तैयार किए गए दो गोडावण पक्षियों को वापस जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को 'रीवाइल्डिंग' का नाम दिया गया है, जो इस संरक्षण कार्यक्रम के एक नए और महत्वपूर्ण चरण का प्रतीक है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मौके पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम अब इन पक्षियों को दोबारा प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने के चरण तक पहुंच गया है। शनिवार को जैसलमेर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने इस पूरी पहल की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में यह कार्यक्रम दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है।
संरक्षण से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि गोडावण का संरक्षण सिर्फ़ पर्यावरण के लिए ही फ़ायदेमंद नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय समुदायों को इको-टूरिज्म के ज़रिए आर्थिक लाभ भी मिलेगा। उन्होंने थार के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गोडावण को एक महत्वपूर्ण प्रजाति बताते हुए घास के मैदानों के संरक्षण और भूमि क्षरण को रोकने में इसकी भूमिका का उल्लेख किया। यह क्षेत्र मध्य एशियाई फ्लाईवे से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भी एक अहम पड़ाव है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कार्यक्रम में शामिल हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे पूरे प्रदेश के लिए गर्व का दिन बताया। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से थार की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को विलुप्त होने की कगार से वापस लाने में मदद मिली है।"
कैसे तैयार हुई जंगल में वापसी की राह?
गोडावण की जंगल में वापसी के लिए रामदेवरा में एक विशेष 'रीवाइल्डिंग एवियरी' (पक्षीशाला) का निर्माण किया गया है। राजस्थान सरकार द्वारा स्वीकृत 9.25 करोड़ रुपए के बजट से बनी यह विशाल पक्षीशाला खंभों के बिना बनाई गई है, ताकि पक्षियों को उड़ने के लिए भरपूर जगह मिल सके। इससे उन्हें अपनी उड़ान क्षमता विकसित करने, प्राकृतिक माहौल में ढलने और जंगल में छोड़े जाने से पहले ज़रूरी व्यवहार सीखने में मदद मिलेगी।
अपने दौरे के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने इन्क्यूबेशन और ब्रीडिंग सुविधा की समीक्षा की और कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों और अधिकारियों से बातचीत भी की। इस अवसर पर जीआईबी संरक्षण की दस साल की यात्रा पर आधारित एक ब्रोशर भी जारी किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा समेत केंद्र और राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
इनपुट: IANS



