भोपाल गैस पीड़ितों का आरोप: BMHRC अपनी मिनी यूनिट्स में स्वास्थ्य सेवाएँ बंद कर रहा
भोपाल गैस त्रासदी के दशकों बाद भी पीड़ितों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती बनी हुई है। त्रासदी पीड़ितों के साथ काम करने वाले चार संगठनों ने आरोप लगाया है कि भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान…
भोपाल गैस त्रासदी के दशकों बाद भी पीड़ितों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती बनी हुई है। त्रासदी पीड़ितों के साथ काम करने वाले चार संगठनों ने आरोप लगाया है कि भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (BMHRC) अपनी छोटी इकाइयों में ज़रूरी चिकित्सा सुविधाओं में कटौती कर रहा है, जिससे मरीज़ों को भारी परेशानी हो रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन संगठनों ने दावा किया है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी सभी आठ मिनी इकाइयों में पैथोलॉजी सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है।
संगठनों का कहना है कि इन मिनी यूनिट्स को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य गैस पीड़ितों को उनके इलाकों के पास ही इलाज मुहैया कराना था। लेकिन अब पैथोलॉजी लैब बंद कर दी गई हैं और उनके उपकरण व कर्मचारियों को मुख्य BMHRC अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। इससे मरीज़ों की जांच रिपोर्ट में देरी हो रही है। उदाहरण के लिए, जिस ब्लड शुगर टेस्ट की रिपोर्ट पहले उसी दिन मिल जाती थी, अब उसमें 48 घंटे तक लग रहे हैं।
एक्स-रे और अन्य सेवाओं पर भी असर
आरोप केवल पैथोलॉजी सेवाओं तक सीमित नहीं हैं। संगठनों के अनुसार, मिनी यूनिट 1, 3, 5 और 8 में एक्स-रे फिल्म लेना भी बंद कर दिया गया है, जिसके चलते मरीज़ों को जांच के लिए मुख्य अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इन सेवाओं को बंद करने के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। कई बार मिनी यूनिट में तैनात एकमात्र नर्स के उपलब्ध न होने पर मरीज़ों को बिना खून का नमूना दिए ही लौटा दिया जाता है।
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (बीजीआईए) की रचना ढिंगरा ने कहा, "गैस त्रासदी से पीड़ितों के इलाकों के करीब स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ये मिनी यूनिट स्थापित की गई थीं। प्रबंधन इन्हें मजबूत करने के बजाय व्यवस्थित रूप से आवश्यक सेवाओं को खत्म कर रहा है।" उन्होंने यह भी बताया कि प्रबंधन नए उपकरण खरीदने को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन मौजूदा सेवाओं को सुचारू रखने पर ध्यान नहीं दे रहा।
मामला सुप्रीम कोर्ट और मंत्रालय तक पहुंचा
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए इन संगठनों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), और BMHRC की निदेशक मनीषा श्रीवास्तव को पत्र लिखा है। 5 अगस्त को ICMR को लिखे पत्र में उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए पैथोलॉजी और एक्स-रे सेवाओं को फिर से बहाल करने का आग्रह किया है। रचना ढिंगरा के अनुसार, बीजीआईए इस मुद्दे को 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान भी उठाएगी, क्योंकि यह कदम पीड़ितों को मुफ्त इलाज देने के अदालत के निर्देशों का उल्लंघन है।
इनपुट: IANS



