बांग्लादेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे की अटकलें तेज
बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के संभावित इस्तीफे को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानीय मीडिया संस्थानों ने सूत्रों के…
बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के संभावित इस्तीफे को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानीय मीडिया संस्थानों ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि राष्ट्रपति पद छोड़ने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है। मोहम्मद शहाबुद्दीन, जिन्होंने अप्रैल 2023 में पदभार संभाला था, जुलाई 2024 के बड़े प्रदर्शनों के बाद भी अपने पद पर बने रहने वाले एकमात्र शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में इस्तीफे की कई वजहें सामने आ रही हैं। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इसी साल मई में जब राष्ट्रपति इलाज के लिए लंदन गए थे, तब उनकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत की जानकारी खुफिया एजेंसियों को मिलने के बाद उन पर पद छोड़ने का दबाव बनाया गया।
इस्तीफे की तारीख और राष्ट्रपति का रुख
'टाइम्स ऑफ बांग्लादेश' के अनुसार, राष्ट्रपति के एक करीबी सूत्र ने दावा किया है कि शहाबुद्दीन 31 जुलाई तक इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद वे ढाका के गुलशन इलाके में स्थित अपने निजी आवास में वापस जा सकते हैं। जब इस बारे में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन पर हुई बातचीत में इस्तीफे की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन इस पर कोई विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया।
हालांकि, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि मामला सिर्फ एक फोन कॉल तक सीमित नहीं है और इसके पीछे के कारण कहीं अधिक जटिल हैं। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार अवामी लीग से जुड़े नेताओं के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर रही है, जिससे देश की राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है।
पद से हटाने की पुरानी कोशिशों का दावा
यह भी उल्लेखनीय है कि हाल ही में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने दावा किया था कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उन्हें पद से हटाने की काफी कोशिशें की थीं। इस साल की शुरुआत में बांग्लादेशी अखबार 'कालेर कांठो' को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने आरोप लगाया था कि अंतरिम सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें अहम चर्चाओं से बाहर रखा गया और उनके खिलाफ साजिशें रची गईं।
उन्होंने कहा था, "उन डेढ़ वर्षों के दौरान मुझे किसी भी चर्चा में शामिल नहीं किया गया, फिर भी मेरे खिलाफ कई साजिशें रची गईं। देश की शांति और व्यवस्था को खत्म करने तथा संवैधानिक शून्यता पैदा करने के कई प्रयास हुए।" शहाबुद्दीन ने कहा कि वे अपने फैसले पर अडिग रहे, जिसके चलते असंवैधानिक तरीकों से उन्हें हटाने की सभी कोशिशें नाकाम रहीं।
इनपुट: IANS



