बांग्लादेश: कई मामलों में जमानत के बाद भी हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास जेल में, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, दो अन्य लंबित मामलों के कारण वे अब भी जेल…
बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, दो अन्य लंबित मामलों के कारण वे अब भी जेल में हैं, जिस पर दुनिया भर के हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दास को पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे हिरासत में हैं।
यह स्थिति तब बनी जब रविवार को बांग्लादेश हाई कोर्ट की एक बेंच ने उन्हें दो मामलों में जमानत दे दी। जस्टिस के.एम. ज़ाहिद सरवर और जस्टिस शेख अबू ताहिर की बेंच ने तोड़-फोड़ और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। ये मामले 26 नवंबर, 2024 को चट्टोग्राम के कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए थे।
कानूनी स्थिति और लंबित मामले
चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने 'द डेली स्टार' अखबार को बताया कि उनके मुवक्किल पर हत्या और देशद्रोह सहित कुल छह मामले दर्ज हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दास को पांच मामलों में हाई कोर्ट और निचली अदालतों से जमानत मिल चुकी है। हालांकि, देशद्रोह के एक मामले में हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने रोक लगा दी है, जिसके चलते उनकी रिहाई संभव नहीं हो पा रही है। चिन्मय दास 25 नवंबर, 2024 से जेल में बंद हैं।
गिरफ्तारी और विरोध प्रदर्शन
चिन्मय दास को 25 नवंबर, 2024 को ढाका में गिरफ्तार किया गया था। अगले ही दिन चट्टोग्राम की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया। उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश सहित दुनिया भर में हिंदू समुदाय ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया
उत्तरी अमेरिका के हिंदुओं के संगठन 'कोएलिशन ऑफ हिंदुज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' (CoHNA) ने दास की लगातार हिरासत की निंदा करते हुए इसे "सरकार द्वारा प्रायोजित उत्पीड़न" और "मजाक" करार दिया है। संगठन ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, "बांग्लादेश में एक हिंदू नेता, जिन्होंने अपने देश में अल्पसंख्यकों की बुनियादी सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाई थी, वे अब लगभग 2 साल से जेल में हैं।" CoHNA ने यह भी सवाल उठाया कि उन पर एक ऐसी हत्या का आरोप लगाया गया है जो उनके पुलिस हिरासत में होने के बाद हुई थी।
संगठन ने बांग्लादेश में हिंदुओं की घटती आबादी का जिक्र करते हुए कहा कि 1951 में 22% से घटकर आज यह 8% रह गई है। उन्होंने इसे "धीमा नरसंहार" बताते हुए पूछा कि क्या अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) इस पर नजर रख रहा है।
इनपुट: IANS



