बांग्लादेश: मानवाधिकार रिपोर्ट ने चुनावी हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुटों को मुख्य रूप से ज़िम्मेदार बताया
बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनावों को लेकर हिंसा पर नियंत्रण एक बड़ी चिंता बनी हुई है, जिसकी एक वजह पिछले चुनावों के दौरान हुई हिंसक घटनाएँ हैं। ढाका स्थित एक मानवाधिकार संगठन 'ओधिकार' की निगरानी…
बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनावों को लेकर हिंसा पर नियंत्रण एक बड़ी चिंता बनी हुई है, जिसकी एक वजह पिछले चुनावों के दौरान हुई हिंसक घटनाएँ हैं। ढाका स्थित एक मानवाधिकार संगठन 'ओधिकार' की निगरानी रिपोर्ट में चुनावी हिंसा को लेकर चौंकाने वाले आँकड़े सामने आए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस रिपोर्ट में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जुड़े गुटों को चुनाव से पहले, मतदान के दिन और चुनाव के बाद हुई अधिकांश हिंसक गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है।
यह रिपोर्ट ढाका के सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (CIRDAP) में सोमवार को हुई एक चर्चा के दौरान पेश की गई। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव-पूर्व हिंसा की 52%, मतदान के दिन की 53% और चुनाव के बाद हुई 75% घटनाओं में लिप्त पाए गए।
हिंसा के आँकड़े और प्रमुख क्षेत्र
रिपोर्ट का हवाला देते हुए बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार 'द डेली स्टार' ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी भी हिंसा में शामिल थे, लेकिन उनकी भागीदारी का आँकड़ा अपेक्षाकृत कम रहा। यह गुट चुनाव से पहले 15%, मतदान के दिन 13% और चुनाव के बाद 9% हिंसक गतिविधियों में शामिल था।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान भी स्थानीय स्तर पर हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाएँ जारी रहीं। हिंसा के हॉटस्पॉट के तौर पर चटगांव, कॉक्स बाज़ार, भोला, मैमनसिंह और ढाका जैसे ज़िले उभरे, जहाँ लोगों को डराने-धमकाने से लेकर मारपीट, संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और हत्या जैसी गंभीर वारदातें हुईं।
घटनाओं का ब्योरा और कार्रवाई
चुनाव से पहले कुल 62 घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें से सर्वाधिक 11 चटगांव में, 8 कॉक्स बाज़ार में, 5-5 ढाका और मैमनसिंह में, जबकि 4 सिराजगंज में हुईं। इनमें से 34 मामलों में अधिकारियों ने कार्रवाई की, लेकिन 28 मामलों में कोई कदम नहीं उठाया गया।
मतदान के दिन 'ओधिकार' ने 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएँ दर्ज कीं। इनमें से 17 घटनाओं में बीएनपी और उसके सहयोगी, 4 में जमात और उसके सहयोगी, और 2 में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, 11 मामलों में कोई पुलिस कार्रवाई नहीं हुई।
इससे पहले पिछले महीने 'ओधिकार' ने बताया था कि इस साल अप्रैल से जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोगों की मौत हुई, जबकि राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान गई और 970 लोग घायल हुए।
इनपुट: IANS



