शनिवार, 8 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु: परिसीमन पर मुख्यमंत्री की बैठक को झटका, AIADMK और DMK समेत कई दलों का बहिष्कार

तमिलनाडु में संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन पर एक आम राय बनाने की मुख्यमंत्री विजय की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों AIADMK, DMK और DMDK ने शनिवार को चेन्नई में बुलाई गई…

तमिलनाडु: परिसीमन पर मुख्यमंत्री की बैठक को झटका, AIADMK और DMK समेत कई दलों का बहिष्कार
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन पर एक आम राय बनाने की मुख्यमंत्री विजय की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों AIADMK, DMK और DMDK ने शनिवार को चेन्नई में बुलाई गई सांसदों की परामर्श बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक का उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया के संभावित प्रभावों पर चर्चा करना था।

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यह बैठक चेन्नई के कलाईवनार अरंगम में दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में होनी है। इसके लिए राज्य के सभी लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों को नई दिल्ली स्थित तमिलनाडु हाउस के माध्यम से निमंत्रण भेजा गया था। सरकार का मकसद इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य के सभी प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर एक साझा रुख तैयार करना था।

विपक्षी दलों ने क्यों बनाई दूरी?

विभिन्न दलों ने बैठक में शामिल न होने के लिए अलग-अलग कारण बताए हैं। DMK ने इसे मुख्यमंत्री विजय सरकार की "एक राजनीतिक कवायद" बताते हुए बहिष्कार की घोषणा की। पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर उसका रुख स्पष्ट है और वह किसी भी कानून पर अपनी स्थिति तभी तय करेगी जब उसे औपचारिक रूप से संसद में पेश किया जाएगा। वरिष्ठ DMK नेता आर.एस. भारती ने शुक्रवार को कहा था कि पार्टी पहले प्रस्तावित कानून के प्रावधानों की जांच करेगी, फिर समर्थन या विरोध का फैसला करेगी।

वहीं, AIADMK के सांसदों के भी बैठक से दूर रहने की संभावना है, क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ सांसद थंबीदुरई और इनबादुरई फिलहाल नई दिल्ली में हैं। DMDK ने भी बैठक में हिस्सा न लेने का फैसला किया है और उम्मीद है कि उसके सांसद सुधीश इसमें शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा, मक्कल निधि मय्यम (MNM) के भी प्रतिनिधित्व की संभावना नहीं है, क्योंकि बताया जा रहा है कि पार्टी के राज्यसभा सांसद कमल हासन अमेरिका में हैं।

क्या है परिसीमन का विवाद?

संसदीय सीटों के पुनर्निर्धारण का यह प्रस्तावित ढांचा विवादास्पद हो गया है, खासकर दक्षिणी राज्यों के लिए। इन राज्यों में यह चिंता बढ़ रही है कि अगर सीटों का बंटवारा मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है, उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी पृष्ठभूमि में तमिलनाडु सरकार यह बैठक कर रही थी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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