महाराष्ट्र में विकास कार्यों की गुणवत्ता सुधरेगी, AI और जियो-टैगिंग से होगी निगरानी
महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में अब सरकारी पैसे से होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों…
महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में अब सरकारी पैसे से होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में चल रही परियोजनाओं की निगरानी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जियो-टैगिंग और जीआईएस मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से की जाएगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कदम का मकसद सड़क निर्माण और जलापूर्ति जैसी योजनाओं में अक्सर लगने वाले भ्रष्टाचार और घटिया काम के आरोपों पर लगाम कसना है।
यह निर्णय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा विधानसभा के मानसून सत्र में की गई एक घोषणा के बाद आया है। उन्होंने शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जवाबदेही बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित ऑडिट को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का वादा किया था। इसी वादे को पूरा करते हुए सरकार ने एक आधिकारिक प्रस्ताव (जीआर) जारी कर दिया है।
नई निगरानी व्यवस्था और समिति का गठन
जारी किए गए सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक, इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए एक विशेष अध्ययन समूह बनाया गया है। इस कमेटी की अध्यक्षता म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन निदेशालय के कमिश्नर और डायरेक्टर करेंगे। कमेटी को एक महीने के भीतर सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। उसका काम मौजूदा तकनीकी और वित्तीय ऑडिट ढांचे में सुधार के लिए सुझाव देना, परियोजनाओं का स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले असर का आकलन करना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी काम गुणवत्ता मानकों और समय-सीमा के भीतर पूरे हों।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
नई तकनीक के ज़रिए अधिकारी हर परियोजना के हर चरण की रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे। AI टूल्स प्रोजेक्ट की सटीकता का विश्लेषण करेंगे और निर्माण की कुल गुणवत्ता का मूल्यांकन करेंगे। ऑनलाइन निगरानी से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि काम तय समय पर पूरा हो। सरकार का मानना है कि इससे गुणवत्ता और पारदर्शिता में बड़ा सुधार आएगा। इस ऑडिट प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों के अलावा स्थानीय नागरिकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), एनजीओ, तकनीकी विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि यह पहल महाराष्ट्र में शहरी प्रशासन को आधुनिक बनाने की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है।
इनपुट: IANS



