त्रिपुरा में विकास की निगरानी के लिए नई व्यवस्था: सभी 8 जिलों को मिले 'पालक मंत्री'
असम और अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर अब त्रिपुरा सरकार ने भी राज्य के सभी आठ जिलों में विकास कार्यों की निगरानी के लिए 'पालक मंत्री' (गार्जियन मिनिस्टर) नियुक्त कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट…
असम और अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर अब त्रिपुरा सरकार ने भी राज्य के सभी आठ जिलों में विकास कार्यों की निगरानी के लिए 'पालक मंत्री' (गार्जियन मिनिस्टर) नियुक्त कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 11 मंत्रियों को इन आठ जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये मंत्री विकास परियोजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों की प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे।
क्या होगी 'पालक मंत्रियों' की भूमिका?
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह नई व्यवस्था जिला स्तर पर प्रशासन को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। पालक मंत्री जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों (जैसे विधायक, जिला परिषद और पंचायत सदस्य) और विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे। उनकी मुख्य जिम्मेदारियों में सरकारी पहलों को समय पर पूरा करवाना, जनता की शिकायतों का समाधान करना और विकास कार्यों का मार्गदर्शन एवं निगरानी करना शामिल है। इस कदम का लक्ष्य राज्य के सभी जिलों में संतुलित, पारदर्शी और प्रभावी विकास सुनिश्चित करना है।
किसे मिली किस जिले की जिम्मेदारी?
विभिन्न जिलों के लिए मंत्रियों का आवंटन इस प्रकार किया गया है:
- धलाई जिला: रतन लाल नाथ (बिजली और कृषि मंत्री)
- पश्चिम त्रिपुरा जिला: प्राणजीत सिंघा रॉय (वित्त मंत्री)
- उत्तर त्रिपुरा जिला: संताना चकमा और शुक्ला चरण नोआतिया
- गोमती जिला: किशोर बर्मन और अनिमेष देबबर्मा
- दक्षिण त्रिपुरा जिला: सुधांशु दास और वृषकेतु देबबर्मा
- उनाकोटी जिला: सुशांत चौधरी
- खोवाई जिला: टिंकू रॉय
- सिपाहीजाला जिला: विकास देबबर्मा
प्रशासनिक मजबूती की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2028 में होने वाले त्रिपुरा विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा सरकार इस पहल के जरिए जमीनी स्तर पर अपने कामकाज को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके तहत प्रशासन को आम लोगों के करीब लाने और योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को मंत्रियों की सीधी निगरानी में दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। गौरतलब है कि असम और अरुणाचल प्रदेश ने कुछ साल पहले इसी तरह की व्यवस्था शुरू की थी।
इनपुट: IANS



