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कांगो में इबोला: मौतें 3,000 पार, अफ्रीका CDC ने कहा- हालात काबू में हैं, यह कहना जल्दबाजी होगी

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी)…

कांगो में इबोला: मौतें 3,000 पार, अफ्रीका CDC ने कहा- हालात काबू में हैं, यह कहना जल्दबाजी होगी
(फोटो: IANS)

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि कुछ हफ्तों से स्थिति स्थिर ज़रूर हुई है, लेकिन यह दावा करना अभी जल्दबाजी होगी कि प्रकोप पूरी तरह नियंत्रण में है।

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अफ्रीका सीडीसी के अधिकारी वेसम मंकौला ने एक ऑनलाइन प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हम पूरे प्रकोप को नियंत्रित करने में सफल हो गए हैं।" उन्होंने यह भी माना कि पिछले दो हफ्तों में मामलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन इस गिरावट के लगातार बने रहने को लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

चिंताजनक आंकड़े और सामुदायिक मौतें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक देश में इबोला के 6,250 पुष्ट मामलों में से 3,039 लोगों की मौत हो चुकी है, जो 48.6 प्रतिशत की मृत्यु दर को दर्शाता है। इस दौरान 1,439 मरीज ठीक भी हुए हैं। यह प्रकोप देश के छह प्रांतों — इतुरी, नॉर्थ किवु, हौट-उएले, त्शोपो, साउथ किवु और बास-उएले — के 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैला हुआ है।

एक गंभीर चिंता यह भी है कि पिछले सात दिनों में हुई 60 प्रतिशत से अधिक मौतें अस्पतालों के बजाय समुदायों के भीतर हुईं। यह इस बात का संकेत है कि कई मरीज समय पर उपचार केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भी चेतावनी दी है कि वायरस का प्रसार नियंत्रण प्रयासों से तेज हो रहा है।

प्रकोप का मौजूदा हाल

हालांकि, कुछ स्वास्थ्य क्षेत्रों में हालात सुधरे हैं। चार क्षेत्रों में 42 दिनों से अधिक समय से कोई नया मामला सामने नहीं आया है, जबकि पांच अन्य क्षेत्रों में यह अवधि 21 से 42 दिनों की है। इसके बावजूद, वेसम मंकौला के अनुसार, 51 स्वास्थ्य क्षेत्रों में संक्रमण अभी भी सक्रिय है। इतुरी प्रांत इस प्रकोप का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां कुल पुष्ट मामलों का 81.9 प्रतिशत हिस्सा पाया गया है।

मई में घोषित यह प्रकोप डीआरसी का अब तक का सबसे बड़ा और घातक इबोला संकट है। यह 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैली महामारी के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी भी बन गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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