शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: 16 करोड़ से ज़्यादा लोग पौष्टिक भोजन से वंचित, महंगाई और घटती आय बड़ी वजह

पाकिस्तान की एक बहुत बड़ी आबादी के लिए स्वस्थ और पौष्टिक भोजन जुटा पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 16.1 करोड़ लोग, यानी करीब 63 प्रतिश…

पाकिस्तान: 16 करोड़ से ज़्यादा लोग पौष्टिक भोजन से वंचित, महंगाई और घटती आय बड़ी वजह
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान की एक बहुत बड़ी आबादी के लिए स्वस्थ और पौष्टिक भोजन जुटा पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 16.1 करोड़ लोग, यानी करीब 63 प्रतिशत जनसंख्या, न्यूनतम पौष्टिक आहार का खर्च भी नहीं उठा पा रही है। यह स्थिति तब है जब दक्षिण एशिया में सबसे सस्ता पौष्टिक भोजन पाकिस्तान में ही मिलता है।

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रिपोर्ट बताती है कि घर, बिजली-पानी और परिवहन जैसे ज़रूरी गैर-खाद्य खर्चों को पूरा करने के बाद ज़्यादातर लोगों के पास अनाज, दाल, दूध, अंडे, फल और सब्जियों जैसे पोषक खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचते। साल 2025 में देश की लगभग दो-तिहाई आबादी न्यूनतम स्वस्थ आहार का खर्च उठाने में असमर्थ पाई गई, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

महंगाई और घटती आय का असर

विश्लेषकों का कहना है कि भले ही खाद्य वस्तुओं की महंगाई 2023 के उच्चतम स्तर से कुछ कम हुई है, लेकिन लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। महंगाई की ऊंची दर के कारण लोगों की खरीदने की क्षमता (क्रय शक्ति) में जो भारी गिरावट आई थी, उसकी भरपाई अब तक नहीं हो सकी है। महंगाई को समायोजित करने के बाद, वास्तविक घरेलू आय में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

गरीबी और खान-पान पर प्रभाव

आय में कमी का सीधा असर गरीबी के आंकड़ों पर पड़ा है। देश में गरीबी दर 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई, जिससे अनुमानित 2.5 करोड़ और लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए। इसका प्रभाव लोगों की थाली पर भी साफ दिख रहा है। दो हालिया सर्वेक्षणों के आंकड़ों की तुलना करने पर पता चलता है कि 14 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 13 की प्रति व्यक्ति खपत में कमी आई है। लोगों ने चावल (19%), दाल (26%) और दूध (10%) का सेवन कम कर दिया है। इसी तरह, मटन, बीफ और चिकन की संयुक्त खपत में भी लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी উল্লেখ किया गया है कि वैश्विक स्तर पर भूख की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। साल 2025 में दुनिया की 7.8% आबादी भूख से प्रभावित रही, जबकि यह आंकड़ा 2024 में 8.1% और 2022 में 8.6% था।

इनपुट: IANS

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