श्रीलंकाई नौसेना ने फिर की कार्रवाई, तमिलनाडु के 10 और मछुआरे कच्चाथीवू के पास गिरफ्तार
श्रीलंकाई नौसेना द्वारा भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। हालिया घटना में, तमिलनाडु के दस और मछुआरों को कच्चाथीवू के पास कथित तौर पर समुद्री सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में पकड़ लिया…
श्रीलंकाई नौसेना द्वारा भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। हालिया घटना में, तमिलनाडु के दस और मछुआरों को कच्चाथीवू के पास कथित तौर पर समुद्री सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में पकड़ लिया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, श्रीलंकाई नौसैनिकों ने उनकी नाव को भी जब्त कर लिया है, जिससे रामनाथपुरम जिले के मछुआरा समुदाय में भारी रोष है।
यह घटनाक्रम बुधवार देर रात का है, जब थंगाचिमदम के राजन नगर निवासी वेलिंगटन की एक मशीनीकृत नाव को श्रीलंकाई नौसेना की निगरानी टीम ने रोका। इससे पहले, बुधवार सुबह ही रामेश्वरम फिशिंग जेट्टी से 297 मशीनीकृत ट्रॉलर समुद्र में उतरे थे। तमिलनाडु मत्स्य पालन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार मछुआरों को पूछताछ के लिए तलाईमन्नार बंदरगाह ले जाया गया है।
गिरफ्तारी और उसके बाद की प्रक्रिया
शुरुआती जांच के बाद, नौसेना ने नाव और उसके सभी 10 सदस्यों को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में जनथन (45), एंटनी पिचाई (38), प्रभु (43), डॉन बॉस्को (55), अरोकिया डेविन (31), वेलुचामी (51), सुब्बैया (52), अरोकिया जेनिस्टन (25) और स्टीविन (30) शामिल हैं। ये सभी रामेश्वरम, पंबन, विरुधुनगर और थंगाचिमदम के रहने वाले हैं। दसवें मछुआरे की पहचान की पुष्टि होना अभी बाकी है। उम्मीद है कि उन्हें गुरुवार को श्रीलंका की एक अदालत में पेश किया जाएगा।
लगातार हो रही घटनाओं से बढ़ा गुस्सा
यह गिरफ्तारी ठीक पांच दिन पहले हुई एक और घटना के बाद हुई है, जिसमें नौ मछुआरों को नेदुनथीवु के पास उनकी नाव में तकनीकी खराबी आने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। उस गिरफ्तारी के विरोध में रामेश्वरम के मछुआरों ने एक दिन के लिए समुद्र में जाने से परहेज भी किया था।
मछुआरों के नेता जेसु राजा ने बार-बार हो रही इन घटनाओं के स्थायी समाधान में विफल रहने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लगातार अपील के बावजूद कोई ठोस कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं हुआ है। इन गिरफ्तारियों और नावों की जब्ती से मछुआरों के परिवारों पर गंभीर आर्थिक और मानसिक असर पड़ रहा है।
इनपुट: IANS



