भारत को सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, निर्माता भी बनना होगा: उपराष्ट्रपति ने AI स्टैक 'ज्ञानी अर्थ' लॉन्च करते हुए कहा
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टैक 'ज्ञानी अर्थ' को लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने भारत के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर…
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टैक 'ज्ञानी अर्थ' को लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने भारत के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश को सिर्फ प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता बने रहने की बजाय अब एक निर्माता बनना होगा, ताकि दुनिया हमारे बनाए उत्पादों का इस्तेमाल कर सके।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपराष्ट्रपति ने कहा, "हमें हमेशा उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए। हमें सृजन करना होगा, ताकि दूसरे उसका उपयोग कर सकें।" उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत बहुत पहले चिप्स का उत्पादन शुरू कर सकता था और शायद अब तक इस क्षेत्र में एक वैश्विक नेता बन चुका होता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस दिशा में मिली नई गति की सराहना की।
क्या है 'ज्ञानी अर्थ' AI स्टैक?
इस AI स्टैक को 'ज्ञानी एआई' नाम की कंपनी ने विकसित किया है। इसके दो मुख्य घटक हैं — 'इवोन 3.3', जो एक बड़ा भाषा मॉडल (Large Language Model) है, और 'प्लेक्सस', जो एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो AI की क्षमताओं को वास्तविक दुनिया के कार्यों और संस्थानों से जोड़ता है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 'ज्ञानी अर्थ' के शुभारंभ को भारत के बढ़ते तकनीकी इकोसिस्टम की ताकत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि भारतीय इंजीनियर न सिर्फ अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं, बल्कि उसका निर्माण भी कर सकते हैं।
AI से रोजगार और विकास की उम्मीदें
उपराष्ट्रपति ने कंप्यूटर के शुरुआती दिनों को याद किया जब लोगों को नौकरियां जाने का डर था, लेकिन हुआ इसके विपरीत और आईटी सेक्टर ने देश-विदेश में रोजगार के अनगिनत अवसर पैदा किए। उन्होंने विश्वास जताया कि ठीक उसी तरह AI भी रोजगार और विकास के नए रास्ते खोलेगा, जो भारत की आर्थिक प्रगति को अगले स्तर पर ले जाएगा। उन्होंने 'इंडिया एआई मिशन' और 'एआई उत्कृष्टता केंद्र' जैसी सरकारी पहलों का भी उल्लेख किया, जो देश में इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही हैं।
तकनीकी आत्मनिर्भरता है 'विकसित भारत' का स्तंभ
सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि तकनीकी क्षमता 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने संसद में AI के उपयोग का भी जिक्र किया, जहां 'डिजिटल संसद' पोर्टल और AI-आधारित अनुवाद सुविधा के जरिए संसदीय कार्यवाही को कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है। उपराष्ट्रपति ने इस पहल के लिए 'ज्ञानी एआई' के सीईओ गणेश गोपालन और सह-संस्थापक व सीटीओ अनंत नागराज को बधाई दी।
इनपुट: IANS



