तमिलनाडु: चावल की बढ़ती कीमतों से राहत देने की तैयारी, सहकारी दुकानों पर सस्ता चावल बेच सकती है सरकार
तमिलनाडु में चावल की बढ़ती खुदरा कीमतों से आम लोगों के बजट पर पड़ रहे असर को देखते हुए राज्य सरकार एक बड़ी राहत योजना पर विचार कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार सहकारी…
तमिलनाडु में चावल की बढ़ती खुदरा कीमतों से आम लोगों के बजट पर पड़ रहे असर को देखते हुए राज्य सरकार एक बड़ी राहत योजना पर विचार कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार सहकारी दुकानों के माध्यम से 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर चावल बेचने की संभावना तलाश रही है।
यह कदम उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होगा जो बाजार में चावल के बढ़े हुए दामों से जूझ रहे हैं। अगस्त में जो चावल 50 से 60 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 70 से 80 रुपये तक पहुंच गई है। चावल के साथ-साथ दालों और खाद्य तेल जैसी अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल देखा गया है।
मूल्य निगरानी समिति की बैठक
इस मुद्दे पर मंगलवार को चेन्नई सचिवालय में खाद्य मंत्री वेंकटरमनन की अध्यक्षता में मूल्य निगरानी समिति की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य सचिव साईकुमार, खाद्य सचिव अमुधा, वित्त सचिव सिद्दीकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। चर्चा का मुख्य केंद्र आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर सामान उपलब्ध कराने के उपायों पर था।
योजना का खाका और चुनौतियाँ
सहकारिता एवं खाद्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, इस योजना के लिए सरकार भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अन्य राज्यों से अच्छी गुणवत्ता वाला चावल खरीदने पर विचार कर रही है। अधिकारी उन राज्यों की पहचान कर रहे हैं जहाँ से चावल की खरीद की जा सकती है और उसकी लागत का आकलन कर रहे हैं।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस पहल को शुरू करने से पहले सरकार कम से कम एक लाख टन चावल की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है। आपूर्ति की पुष्टि और खरीद व्यवस्था को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही रियायती बिक्री शुरू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, यह योजना विचाराधीन है और इसकी कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है।
इनपुट: IANS



