अमेरिका-ईरान तनाव: विशेषज्ञ ने चेताया, मध्य-पूर्व एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है
मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर है, जहाँ दोनों ही देश एक-दूसरे पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। दक्षिण-पूर्व और मध्य एशिया के मामलों के विशेषज्ञ और विदेशी प
मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर है, जहाँ दोनों ही देश एक-दूसरे पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। दक्षिण-पूर्व और मध्य एशिया के मामलों के विशेषज्ञ और विदेशी पत्रकार डॉ. वाएल अव्वाद ने समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, यह स्थिति क्षेत्र को एक और व्यापक युद्ध की ओर धकेल सकती है।
डॉ. अव्वाद ने अमेरिका के हालिया कदमों को तनाव बढ़ाने वाली एक बड़ी कार्रवाई बताया है। उन्होंने आशंका जताई कि इसके जवाब में ईरान, विशेष रूप से कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है।
समझौते के बावजूद बढ़ता टकराव
विशेषज्ञ ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि इसके पहले ही बिंदु में लेबनान सहित सभी तरह की गतिविधियों को रोकने का प्रावधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दक्षिणी लेबनान पर हमले रोकने के लिए राजी नहीं कर सके, तो उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान को उकसाने की रणनीति अपनाई।
समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुच्छेद चार का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के एक हिस्से में जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ईरान की है। डॉ. अव्वाद के मुताबिक, अब तक ईरान और ओमान इस क्षेत्र की निगरानी करते आए हैं, लेकिन अमेरिका जानबूझकर ईरान को उकसा रहा है ताकि नौवहन के रास्ते बदले जा सकें, जो मौजूदा तनाव की असली वजह है।
नाटो को शामिल करने की अमेरिकी कोशिश
डॉ. अव्वाद का मानना है कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिका समझौते की शर्तों का पालन करने में सक्षम नहीं है। यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका होर्मुज की निगरानी और ईरान का सामना करने के लिए नाटो देशों को भी इस विवाद में शामिल करना चाहता है।
उनके विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूरा नियंत्रण है, इसीलिए उसने नाटो बलों के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। डॉ. अव्वाद ने चेतावनी दी कि समझौते की 60 दिन की समयसीमा पूरी होने से पहले अगले दो-तीन महीने पूरे क्षेत्र के लिए बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण होंगे।
इनपुट: IANS



